'हम महिलाओं के साथ छलावा नहीं होने देंगे', महिला आरक्षण बिल पर बोले अखिलेश यादव, सरकार के सामने रखी ये मांग
Akhilesh Yadav on Women's Reservation Bill: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी सबसे बड़ी आपत्ति यही है कि पहले जनगणना कराई जाए और फिर महिला आरक्षण की बात उठाई जाए। जो सरकार महिलाओं को गिनना नहीं चाहती है, वो भला उन्हें आरक्षण क्या देगी।
- भारत
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Akhilesh Yadav: महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित बिल को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बयान जारी किया है। उन्होंने महिला आरक्षण की बात उठाने से पहले जनगणना कराने की बात कही है। अखिलेश ने यहा कि जो सरकार महिलाओं को गिनना नहीं चाहती है, वो भला उन्हें आरक्षण क्या देगी।
सरकार ने 16, 17 और 18 अप्रैल को सदन की विशेष बैठक बुलाई है। इस दौरान सदन में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े अहम बिल पर चर्चा की संभावना है।
महिला आरक्षण बिल का आधार ही निराधार है- अखिलेश
महिला आरक्षण बिल को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने X पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने लिखा, "जब गिनती ही गलत होगी तो आरक्षण कैसे सही होगा। अगर किसी काम को करने की सही मंशा होती है, तो शंका नहीं होती है।"
अखिलेश ने कहा कि महिला आरक्षण बिल का आधार ही निराधार है। आरक्षण का आधार अगर कुल सीटों का 1/3 (एक तिहाई) है तो इसका मतलब हुआ कि ये गणित का विषय है और गणित का आधार अंक होते हैं, संख्याएं होती हैं, कोई हवा हवाई बात नहीं।
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‘2011 के पुराने आंकड़ों को आधार बनाएंगे तो…’
उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले में संख्या का आधार जनसंख्या होती है, जिसका आधार जनगणना होती है। जब महिलाओं की जनसंख्या के लिए 2011 के पुराने आंकड़ों को आधार बनाएंगे तो महिला आरक्षण की आधारभूमि ही गलत होगी, जब भूमि में ही दोष होगा तो सच्ची फसल कैसे उगेगी।
अखिलेश ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी आपत्ति यही है कि पहले जनगणना कराई जाए और फिर महिला आरक्षण की बात उठाई जाए। जो सरकार महिलाओं को गिनना नहीं चाहती है, वो भला उन्हें आरक्षण क्या देगी। महिलाओं के साथ भाजपा और उनके संगी-साथी जो धोखा करना चाहते हैं, महिलाओं के साथ वो छलावा हम नहीं होने देंगे। कुल मिलाकर सरकार से हमारा ये कहना है: जब तक जनगणना नहीं, तब तक महिला आरक्षण पर बहस करना नहीं।
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PM मोदी का आया था बयान
अखिलेश यादव की महिला आरक्षण बिल पर यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि संसद का बजट सत्र तीन दिन के लिए बढ़ा दिया गया है जिससे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले 2023 में पारित कानून को 2029 से लागू किया जा सके।