'बेटी बोझ नहीं, अभिमान है', तलाक के बाद पिता ने बजवाए ढोल, कोर्ट से घर तक नाचते-गाते किया स्वागत; VIDEO

Viral Video: बेटी के तलाक के बाद रिटायर्ड जज पिता ने उसका घर में स्वागत करते हुए ढोल-नगाड़े बजवाए। इस दौरान परिवार ने जमकर डांस भी किया। 8 साल पहले मेजर से बेटी की शादी हुई थी।

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Meerut Viral Video
तलाक के बाद पिता ने बेटी का किया स्वागत | Image: Instagram

Meerut Viral Video: समाज में जहां तलाक और बेटियों की मायके में वापसी को बदनामी के तौर पर देखा जाता है। वहीं, मेरठ के एक परिवार ने एक अनोखी मिसाल पेश की है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पिता अपनी बेटी को तलाक के बाद न सिर्फ खुशी से घर लाते दिख रहे हैं, बल्कि ढोल-नगाड़ों से उसका स्वागत भी कर रहे हैं।

2018 में हुई थी शादी

मेरठ में शास्त्री नगर के रहने वाले रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा की बेटी प्रणिता की शादी साल 2018 में शाहजहांपुर के रहने वाले मेजर गौरव अग्निहोत्री हुई थी। दोनों का एक बेटा भी है। शुरू में तो उनके रिश्ते में सबकुछ ठीक और सामान्य था, लेकिन बीतते वक्त के साथ धीरे-धीरे उनकी शादी में तनाव बढ़ने लगा।

पति और ससुरावाले उसे परेशान करने लगे। उसे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से परेशान किया जाता रहा। बेटी को उम्मीद थी कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अंत में उसने तलाक का फैसला किया। तलाक के लिए कई साल कानूनी प्रक्रिया चली और आखिरकार 4 अप्रैल 2026 को अदालत ने प्रणिता के पति संग तलाक को मंजूरी दे दी।

सम्मान के साथ घर में बेटी को वापस लेकर आए

तलाक के बाद आम तौर पर जहां परिवारों में मायूसी छा जाती है, लेकिन प्रणिता के पिता ने एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने जिस तरह से शादी के समय धूमधाम से बेटी को विदा किया था। ठीक उसी तरह, घर में वापसी के समय वे ढोल-नगाड़ों से उसका स्वागत करते नजर आए।

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इस दौरान परिवार और रिश्तेदार भी इकट्ठा थे। जैसे ही बेटी कार से उतरी, उस पर फूलों की बारिश शुरू की गई। कई लोग नाचते-गाते हुए प्रणिता का घर में ग्रैंड वेलकम करते नजर आए। इस दौरान सबने टी-शर्ट भी पहनी थी, जिस पर प्रणिता की तस्वीर छपी थी और बड़े अक्षरों में लिखा था- I Love My Daughter।

समाज को दिया बड़ा संदेश

पिता ज्ञानेंद्र शर्मा ने समाज को बड़ा संदेश देते हुए कहा कि अगर मेरी बेटी वहां शादी में दुखी थी, तो उसे खुशी देना मेरी जिम्मेदारी थी। बेटी शादी में बाजे-गाजे के साथ विदा हुई थी। मैं उसे उसी सम्मान के साथ वापस लेकर आया हूं। मैंने उन लोगों से कोई एलीमनी या फिर सामान नहीं लिया है।

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उन्होंने यह भी कहा कि बेटी को भी बेटे की तरह ही परिवार का बराबर सदस्य माना जाना चाहिए। समाज में सोच है कि बेटी की डोली जाती है, तो अर्थी ही लौटनी चाहिए। इस सोच में थोड़ा बदलाव आया है, लेकिन असली बदलाव अभी बाकी है।

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Published By :
Ruchi Mehra
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