अपडेटेड 2 March 2025 at 20:57 IST

उप्र: 27 साल पुराने दंगा मामले में 45 आरोपी बरी, शस्त्र अधिनियम में चार को तीन-तीन साल की कैद

कानपुर की एक त्वरित अदालत ने दंगे से जुड़े 27 साल पुराने उस मामले में 45 आरोपियों को बरी कर दिया है।

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27 साल पुराने दंगा मामले में 45 आरोपी बरी | Image: AI Photo (सांकेतिक फोटो)

कानपुर की एक त्वरित अदालत ने दंगे से जुड़े 27 साल पुराने उस मामले में 45 आरोपियों को बरी कर दिया है, जिसमें एक वरिष्ठ अधिकारी की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और कई अन्य को भी गंभीर चोटें आई थीं।

वहीं, अदालत ने दंगा मामले में चार आरोपियों को शस्त्र अधिनियम के तहत तीन-तीन साल की कैद की सजा सुनाई है।

अधिवक्ताओं ने रविवार को बताया कि अदालत ने सबूतों के अभाव में 45 आरोपियों को बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन विचाराधीन कैदियों के खिलाफ मामले को मजबूत बनाने में विफल रहा। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा, बरी किए गए 45 आरोपी पहले से ही जमानत पर बाहर थे।

शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र उत्तम ने बताया कि हालांकि, त्वरित अदालत ने दंगा मामले में चार आरोपियों को शस्त्र अधिनियम के तहत तीन-तीन साल की जेल की सजा सुनाई है। उन्होंने बताया कि सभी दोषियों को जमानत दे दी गई है, क्योंकि उनकी सजा तीन साल से कम है।

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बचाव पक्ष के अधिवक्ता शकील अहमद बुंदेल, जिन्होंने 77 आरोपियों में से 24 का प्रतिनिधित्व किया, ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि दंगा नौ जनवरी 1998 को हुआ था, जब सैकड़ों लोग रायपुरवा के लक्ष्मीपुरवा में एक मस्जिद के इमाम पर हमला करने वालों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए थे और जिले की बिजली आपूर्ति बाधित कर दी थी।

शकील ने कहा कि स्थिति तब बिगड़ गई थी, जब हजारों लोग हलीम कॉलेज क्रॉसिंग पर एकत्र हुए और पुलिस टीम पर पथराव किया व गोलियां चलाईं। देखते ही देखते चमनगंज और रायपुरवा समेत विभिन्न इलाकों में आंदोलन फैल गया और सड़कों पर सभाएं होने लगीं। इस बीच, भगदड़ और पथराव भी शुरू हो गया।

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तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) अशोक कुमार घटना स्थल पर पहुंचे थे, जहां उनके गनर पुलिस आरक्षी कुंवर पाल सिंह के माथे पर गोली लगी थी। सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। तत्कालीन थाना प्रभारी ने दंगे के संबंध में शिकायत दर्ज की थी और 77 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

पुलिस ने मुमताज अहमद, इस्लामुद्दीन, खुर्शीद आलम, मोहम्मद आसिफ, इसरार अहमद और मोहम्मद शफी समेत छह लोगों के पास से अवैध हथियार भी जब्त किए थे। शकील ने कहा, इन वर्षों में 13 आरोपियों की मौत हो गई और दो अन्य की फाइलें बाकी से अलग कर दी गईं।

उन्होंने बताया कि विस्तृत फैसला सोमवार को उपलब्ध होने की उम्मीद है। पेशे से ड्राइवर मेराज खान ने मीडियाकर्मियों से कहा कि वह न्याय मिलने से खुश है।

खान ने कहा, "हम सभी निर्दोष थे और यह अदालत के समक्ष साबित हो चुका है, जिसने दंगा मामले में 45 लोगों को बरी कर दिया है। हमारे परिवार के सदस्यों को पिछले 27 वर्षों के दौरान बहुत कष्ट सहना पड़ा, क्योंकि वे अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने में असफल रहे।"

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Published By : Deepak Gupta

पब्लिश्ड 2 March 2025 at 20:57 IST