Earthquake: पाकिस्‍तान के बाद अब भारत में भूकंप के झटके, जानिए कहां कितनी तीव्रता से कांपी धरती; दहशत में आए लोग

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में शुक्रवार की सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। जानकारी के मुताबिक‍ भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.6 मापी गई है।

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Earthquake | Image: X

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में शुक्रवार की सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। जानकारी के मुताबिक‍ भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.6 मापी गई है। इसका केंद्र पड़ोसी देश बांग्लादेश के टुंगी में था। भूकंप के झटकों से दहशत में आए लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। झटके 10 बजकर 10 मिनट पर महसूस किए गए। ये झटके ढाका में भी महसूस हुए हैं।

यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र बांग्लादेश के टुंगी से 27 किलोमीटर पूर्व में था। इसकी गहराई 10 किलोमीटर बताई जा रही है। यह झटके कोलकाता के साथ ही आसपास के जिलों और उत्तर बंगाल में भी महसूस किए गए। कूचबिहार, दिनाजपुर में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।

पाकिस्‍तान में भी हिली धरती

इससे पहले पाकिस्तान में गुरुवार रात को करीब 5.3 तीव्रता का भूकंप आया जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। इस भूकंप के झटके अफगानिस्तान सीमा के पास के इलाकों में महसूस किए गए, लेकिन पाकिस्तान के इस्लामाबाद और पेशावर जैसे शहरों में कोई क्षति की सूचना नहीं मिली।

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अफगानिस्तान में भी आया भूकंप

अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार पहला झटका रात 1:59 बजे आया, जिसका केंद्र लगभग 190 किलोमीटर की गहराई पर था। इसके बाद सुबह 3:09 बजे पाकिस्तान में दूसरा, अधिक तीव्र झटका महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 5.2 रही।

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अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की टकराहट के कारण हल्के से लेकर तेज झटकों तक, भूकंप अक्सर आते रहते हैं।

आखिर क्यों आते हैं भूकंप

भूंकप आखिर क्यों आते हैं, इसको समझने के लिए पहले हमें धरती की बनावट को सही से समझना होगा। धरती की बाहरी सतह (जिसमें क्रस्ट और ऊपरी मेंटल आते हैं) 15 बड़ी और छोटी प्लेटों से बनी हुई है। ऐसा नहीं है कि ये प्लेट स्थिर हैं। बल्कि ये बहुत धीरे इधर-उधर घूमती हैं। जब ये प्लेट एक दूसरे के सापेक्ष (आमने-सामने) में मूव करते हुए एक-दूसरे से रगड़ खाती हैं, तब भूकंप आता है।

यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे की साइट के अनुसार धरती के नीचे मौजूद ये प्लेट हमेशा धीरे-धीरे चलती हैं। घर्षण यानी फ्रिक्शन के कारण वे अपने किनारों पर अटक जाती हैं। इस कारण जब किनारे पर पड़ रहा तनाव फ्रिक्शन के फोर्स से ज्यादा हो जाता है, जिससे एनर्जी रिलीज होती है। जब यह एनर्जी लहर के रूप में धरती की परत से होकर गुजरती है तो हमें कंपन महसूस होता है। इसी कंपन को भूकंप आना कहते हैं और इसको रिक्टर स्केल पर नापते हैं।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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