ठाणे की अदालत ने बलात्कार के मामले में शैक्षणिक संस्थान के अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज की

ठाणे की एक अदालत ने एक महिला से बलात्कार के मामले में एक शैक्षणिक संस्थान के अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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बलात्कार के मामले में शैक्षणिक संस्थान के अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज की | Image: AI Photo (सांकेतिक फोटो)

ठाणे की एक अदालत ने एक महिला से बलात्कार के मामले में एक शैक्षणिक संस्थान के अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज कर दी।अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत उपलब्ध हैं और मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।

ठाणे के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सूर्यकांत एस. शिंदे ने चार मार्च को पारित आदेश में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।अदालत के आदेश की प्रति शनिवार को उपलब्ध कराई गई। शैक्षणिक संस्थान के अध्यक्ष रमेशचंद्र शोभनाथ मिश्रा (आरोपी) को इस वर्ष 30 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।

पीड़िता की शिकायत के अनुसार, वह साल 2013 में शिक्षण के क्षेत्र में नौकरी की तलाश के लिए अपनी एक रिश्तेदार के जरिये आरोपी से मिली थी।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के एक शैक्षणिक संस्थान के अध्यक्ष (आरोपी) ने पीड़िता को नौकरी दिलाने के लिए कथित तौर पर सात लाख रुपये की मांग की और प्रति माह 70,000 से 80,000 रुपये वेतन दिलाने का वादा किया।

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दर्ज मामले के अनुसार, पीड़िता किसी तरह छह लाख रुपये दे पाई। इसके बाद आरोपी ने 2015 में नौकरी पक्की करने के बदले में उससे कथित तौर पर 10 लाख रुपये की और मांग की। जब पीड़िता ने पैसे देने से इनकार कर दिया तो आरोपी ने कथित तौर पर उसे यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया और किसी को भी इसके बारे में बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे नौकरी दिलाने के बहाने कई बार उसका यौन शोषण किया था।

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आरोपी की पैरवी करने वाले वकील ने तर्क दिया कि संबंधित महिला जूनियर कॉलेज की नौकरी के लिए योग्य नहीं थी क्योंकि उसके पास स्नातकोत्तर की डिग्री नहीं थी। वकील ने आरोप लगाया कि व्यक्तिगत रंजिश के कारण यह मामला दर्ज कराया गया है।

वकील ने आरोपी के लिए जमानत का अनुरोध करते हुए उसकी स्वास्थ्य स्थिति का हवाला दिया और कहा कि वह डायबिटीज का मरीज है और उसका इलाज जारी है।

अतिरिक्त लोक अभियोजक संजय मोरे ने तर्क दिया कि कई महिलाओं ने आरोपी के खिलाफ इसी तरह के आरोप लगाए हैं, इसलिए मामले की जांच करने की जरूरत है।

न्यायाधीश शिंदे ने कहा, ‘‘शिकायत में लगाए गए आरोपों पर विचार करते हुए इस स्तर पर रिकॉर्ड पर पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। मामले की जांच प्रारंभिक चरण में है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अपराध की प्रकृति और मामले की जारी जांच को देखते हुए इस स्तर पर आवेदक/आरोपी को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है।’’

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Published By:
 Deepak Gupta
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