राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा तमिलनाडु? थलपति विजय की बंपर जीत के 4 दिन बाद भी सरकार पर सस्पेंस बरकरार, क्या-क्या है ऑप्शन?
Tamil Nadu: इस समय तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर पूरा सस्पेंस बना हुआ है। थलापति विजय अब तक बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाए हैं। इस बीच DMK और AIADMK के बीच भी खिचड़ी पक रही है।
- भारत
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Tamil Nadu Government Formation: तमिलनाडु चुनाव के नतीजे इस बार चौंकाने वाले आए। थलापति विजय ने अपने ही चुनाव में कमाल कर दिखाया। महज 2 साल पहले बनी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने अकेले 108 सीटों पर जीत दर्ज कर ली और चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं, DMK और AIADMK दोनों ही गठबंधन बहुमत से बहुत दूर रह गए। विजय ने चुनाव में 'सेंचुरी' तो लगाई, लेकिन वे अब तक बहुमत का आंकड़ा जुटाने में सफल नहीं हो पाए है। ऐसे में राज्य में लगातार सरकार बनाने को लेकर पेंच फंस रहा है।
तमिलनाडु में विधानसभा की 234 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 118, जो इस बार किसी भी पार्टी को नहीं मिला। विजय भी इस आंकड़े से 10 सीट दूर रह गए। ऐसे में यही जुटाना अब उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है। राज्यपाल ने उन्हें बहुमत जुटाने की बात कहकर दो बार खाली हाथ लौटाया है।
इस वक्त तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। कौन-सी पार्टियां मिलकर सत्ता में आएंगी, इस पर अभी कुछ भी साफ नहीं कहा जा सकता। मौजूदा स्थिति को देखते हुए तीन प्रमुख संभावनाएं उभरकर सामने आ रही हैं। आइए विस्तार से जानते हैं...
विजय को जुटाना होगा बहुमत का आंकड़ा
थलापति विजय की TVK क्योंकि सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, तो वे राज्य की सत्ता पर काबिज भी होना चाहिए। पार्टी 108 सीटों पर जीती हैं, लेकिन इसमें विजय की दो सीटें शामिल हैं, जिसमें से उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। ऐसे में TVK के पास 107 विधायक हैं। वहीं, कांग्रेस भी TVK को अपना समर्थन देने के लिए तैयार है। कांग्रेस ने चुनाव में 5 सीटें जीती हैं। दोनों के मिलाकर 112 विधायकों का समर्थन ही अब तक जुट पाया है। तब भी वे बहुमत के आंकड़े से छह दूर रह जाएंगे। अगर विजय सत्ता में आना चाहते हैं और सीएम की कुर्सी तक पहुंचना चाहते हैं, तो उन्हें बहुमत के आंकड़े तक पहुंचना होगा। इसके लिए उन्हें पांच और विधायकों का समर्थन चाहिए होगा।
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DMK और AIADMK आएंगे साथ?
सियासी गलियारों में चर्चाएं ये भी हैं कि दो सियासी दुश्मन DMK और AIADMK का मिलकर पर्दे के पीछे अलग ही खेल चल रहा है। दोनों के साथ आने की सुगबुगाहट तेज है। अगर ऐसा होता है तो तमिलनाडु में पूरा गेम ही पलट जाएगा। सूत्रों के मुताबिक AIADMK अब NDA से बाहर निकलने की तैयारी में है। डीएमके गठबंधन, सिर्फ AIADMK के साथ गठबंधन करता है तो इनके पास 120 सीटें होंगी, जो बहुमत से दो ज्यादा हैं।
राज्यपाल के पास क्या ऑप्शन?
संविधान के मुताबिक राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुला सकते हैं। ऐसी स्थिति में विजय को कुछ दिनों में विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा। वहीं, अगर DMK, AIADMK या अन्य दल मिलकर बहुमत का दावा पेश करते हैं, तो इस स्थिति में राज्यपाल उनको सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।
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तो क्या लग जाएगा राष्ट्रपति शासन?
अगर कोई भी दल या गठबंधन सदन में बहुमत साबित करने में असफल रहता है, तो राज्यपाल केंद्र सरकार को इसकी रिपोर्ट भेज सकते हैं। ऐसी स्थिति में तमिलनाडु में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। इसके बाद विधानसभा को ‘सस्पेंडेड एनीमेशन’ (निलंबित अवस्था) में रखा जा सकता है, जिससे दलों को सरकार बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
संविधान के अनुसार, दोबारा चुनाव कराना अंतिम विकल्प है। सबसे पहले सभी संभावित गठबंधनों और विकल्पों को आजमाया जाता है। जब कोई भी स्थिर सरकार बनने की संभावना नहीं बचती, तभी विधानसभा को भंग कर नए चुनाव कराए जाते हैं।