लोकसभा स्पीकर के बाद होगा डिप्टी स्पीकर का चुनाव? PIL पर सुनवाई के लिए तैयार हुआ सुप्रीम कोर्ट
अठारहवीं लोकसभा स्पीकर पद के लिए हुए चुनाव में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच में तलवारें तन गई थीं। विपक्ष पहले ही कह चुका है कि डिप्टी स्पीकर के लिए दावा करेगा।
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Lok Sabha Deputy Speaker: लोकसभा स्पीकर चुनाव के बाद अब डिप्टी स्पीकर के चुनाव की मांग तेज हो गई। लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का चुनाव कराने की मांग को लेकर दाखिल की गई PIL पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) भी तैयार हो गया है। कोर्ट इस मामले पर 22 जुलाई को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर याचिकाकर्ता के वकील ने दलील देते हुए कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि अभी तक लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद क्यों खाली है, अब तक इसके लिए चुनाव क्यों नहीं हुआ?
अठारहवीं लोकसभा में स्पीकर पद के लिए हुए चुनाव में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच में तलवारें तन गई थीं। विपक्ष पहले ही कह चुका है कि डिप्टी स्पीकर के लिए दावा करेगा। पिछली बार से लोकसभा में डिप्टी स्पीकर यानी उपाध्यक्ष का पद खाली पड़ा है। आजाद भारत में डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को देने की परंपरा रही है। 17वीं लोकसभा में उपाध्यक्ष के पद की कोई खास जरूरत नहीं पड़ी, इसका कारण ये है कि 17वीं लोकसभा में विपक्ष लगभग नहीं के बराबर था।
केंद्र सरकार ने नहीं दिया जवाब
डिप्टी स्पीकर का पद खाली होने और चुनाव से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी, 2023 में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया है। ये ही कारण है कि सरकार की तरफ से जवाब नहीं मिलने के कारण मामले की सुनाई अभी तक टलती रही। 2023 में दाखिल जनहित याचिका में ये आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार के जवाब की मांग की गई थी कि लोकसभा के 4 साल बीत जाने के बाद भी डिप्टी स्पीकर का पद खली क्यों है? जबकि संविधान का अनुच्छेद 93 स्पष्ट रूप से कहता है कि लोकसभा में स्पीकर के अलावा एक डिप्टी स्पीकर भी होगा।
इस राज्यों में भी पद खाली
डिप्टी स्पीकर के चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट में शारिक अहमद की तरफ से याचिका दाखिल की गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट में ये भी कहा गया कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और झारखंड की विधानसभाओं में भी डिप्टी स्पीकर का पद खाली पड़ा है, जो संविधान के अनुच्छेद 178 का उल्लंघन है।
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