'बेशर्मी भरा और जान-बूझकर किया काम, सेंट्रल फोर्स तैनात करो...', बंगाल में जजों पर हमले को लेकर SC ने जताई नाराजगी; ममता सरकार को लगाई फटकार

मालदा जिले में जजों पर हुए हमले पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए ममता सरकार को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने आदेश दिया की अधिकारियों की सुरक्षा के लिए सेंट्रल फोर्स की तैनात की जाए।

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SC Expresses Displeasure Mamata Government
ममता सरकार को लगाई SC ने लगाई फटकार | Image: X

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) कार्य के दौरान न्यायिक अधिकारियों पर हमले की घटना का देश भर में विरोध हो रहा है। गुरुवार, 2 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। सुनवाई के दौरान घटना पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार पर जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने निर्देश दिए है कि अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत केंद्रीय बलों की तैनाती की जाए।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चिंता जताते हुए कहा कि पहले से सूचना दिए जाने के बावजूद, राज्य के अधिकारी तुरंत कार्रवाई करने में नाकाम रहे, जिससे न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक बिना किसी सुरक्षा, भोजन या पानी के रहना पड़ा। कोर्ट ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक शामिल हैं को उनकी निष्क्रियता के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने ECI को निर्देश दिया कि वह न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और SIR निर्णय प्रक्रिया के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त केंद्रीय बलों की मांग करे और उन्हें तैनात करे।

बेशर्मी भरा और जान-बूझकर किया गया काम-SC 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक बेशर्मी भरा और जान-बूझकर किया गया प्रयास बताया। कोर्ट ने कहा, इन घटनाओं को देखकर हमें बहुत निराशा हुई है। हमारे पिछले आदेश में यह साफ तौर पर कहा गया था कि जिन न्यायिक अधिकारियों को SIR प्रक्रिया पर फैसला सुनाने का काम सौंपा गया है, उन्हें बिना किसी डर या रुकावट के अपना काम करने दिया जाना चाहिए। जो घटना हुई है, वह बेहद ढिठाई भरी है और कानून के राज की बुनियाद पर ही चोट करती है। यह अदालत के अधिकार को सीधी चुनौती देने जैसा है।

SC ने ममता सरकार को लगाई फटकार

कोर्ट ने आगे कहा, ये अचानक किया गया काम नहीं था, बल्कि ऐसा लगता है कि यह न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और आपत्तियों पर फैसला सुनाने की चल रही प्रक्रिया में रुकावट डालने की एक सोची-समझी और जान-बूझकर की गई कोशिश थी। हम किसी भी व्यक्ति या समूह को कानून अपने हाथ में लेने या न्यायिक अधिकारियों के मन में मानसिक डर पैदा करने की इजाजत नहीं देंगे। यह रवैया बिना किसी शक के अदालत की आपराधिक अवमानना ​​के बराबर है।

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मालदा में जजों के साथ क्या हुआ था?

बता दें कि बुधवार,1 अप्रैल 2026 को मालदा जिले में SIR कार्य में शामिल सात न्यायिक अधिकारियों (जिला और सेशन जज स्तर के), जिनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल हैं, पर स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने पथराव और लाठियों से हमला किया। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया और कई घंटों तक चक्का जाम भी किया गया। शाम 5 बजे उन्होंने अधिकारियों का घेराव किया और रात 11 बजे तक उन्हें बंधक बनाए रखा।

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Published By:
 Rupam Kumari
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