Parliament Session: हंगामे के बीच संसद में पेश हुआ सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने वाला संशोधन बिल, कानून मंत्री मेघवाल ने रखा प्रस्ताव

संसद के मॉनसूत्र सत्र का आगाज विपक्ष के भारी हंगामे के साथ हुआ। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। हंगामे के बीच ही केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संशोधन विधेयक पेश किया।

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Parliament Monsoon Session
हंगामे के बीच बिल पेश | Image: Youtube

Parliament Monsoon Session: संसद के मॉनसून सत्र का आगाज भारी हंगामे के साथ हुआ। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा किया। इसके चलते पहले दोनों सदनों की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित हुई। सत्र दोबारा शुरू होने के बाद भी हंगामा थमा नहीं, जिसके बाद कार्यवाही को फिर 12.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

हंगामे से हुई सत्र की शुरुआत

सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ मिनटों बाद हंगामा शुरू हो  गया। विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर जमकर नारेबाजी की। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और सभी को बोलने का समय दिया जाएगा। इस दौरान लोकसभा के साथ साथ राज्यसभा की कार्यवाही को स्थगित किया गया।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पेश किया बिल

लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर चेयर पर डिप्टी स्पीकर पैनल के दिलीप सैकिया नजर आए। इस दौरान कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य वेल में आ गए। वेल में आकर विपक्षी सदस्य जोरदार हंगामा करने लगे। विपक्ष के हंगामे के बीच ही कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संशोधन विधेयक पेश किया। इस बिल के संसद से पारित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी।

इस विधेयक के पारित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 हो जाएगी। CJI को मिलाकर सुप्रीम कोर्ट में कुल जजों की क्षमता 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी। यह विधेयक मई 2026 में सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को रिप्लेस करेगा।

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यह बिल क्यों लाया गया?

सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जजों की संख्या बढ़ने से मुकदमों का निपटारा तेजी से हो सकेगा।  कई महत्वपूर्ण मामलों के लिए 5 या उससे अधिक जजों की संविधान पीठ बनानी पड़ती है। जजों की संख्या अधिक होने से नियमित सुनवाई के साथ-साथ संविधान पीठों का काम भी प्रभावित नहीं होगा।

मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले आज (20 जुलाई) को पीएम मोदी ने मीडिया को भी संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि समय की मांग है कि राष्ट्रनिष्ठा से भरे हुए, राष्ट्रभक्ति के लिए जी रही आवाजों को सदन में उचित मंच मिलता रहे, वे अपनी आवाज को बुलंद करें, देश को दिशा दें। जहां तथ्य होते हैं, जहां तर्क होते हैं, वहां तूफान के लिए जगह नहीं होती। अगर तर्क मजबूत है, तथ्य मजबूत है, शांत चित्त से भी अपनी आवाज को बुलंद बनाया जा सकता है। तर्क और तथ्य के साथ सदन की चर्चा को समृद्ध किया जाए। हर आवाज को अवसर मिले, हर विचार को सम्मान मिले। ये संसद की हमारी भूमिका है। मैं सभी सांसदों से बढ़-चढ़कर इस सदन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित करता हूं।  

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Published By:
 Ruchi Mehra
पब्लिश्ड