अपडेटेड 28 November 2024 at 21:11 IST

जजों की कमी से जूझ रहे लोअर कोर्ट, 11 महीने में बढ़े 9 लाख लंबित मामले; फिर भी 5000 जजों के पद खाली

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में बताया कि एक जनवरी तक निचली अदालतों में 4.44 करोड़ से अधिक मामले लंबित थे। 15 नवंबर तक यह संख्या 4.53 करोड़ हो गई।

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जजों की कमी से जूझ रहे लोअर कोर्ट, 11 महीन में बढ़े 9 लाख केस | Image: Meta AI

Shortage of Judges in India: देश की अदालतों में मुकदमों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और जजों पर इसका बोझ बढ़ रहा है। भारत सरकार ने गुरुवार को जानकारी देते हुए राज्यसभा को बताया कि पिछले 11 महीनों में जिला और अधीनस्थ अदालतों (Subordinate courts) में लंबित मामलों की संख्या में 9 लाख से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। जजों की संख्या के हिसाब से यह आंकड़ा बहुत अधिक है।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उच्च सदन को एक प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि एक जनवरी तक अलग-अलग निचली अदालतों में 4.44 करोड़ से अधिक मामले लंबित थे। उन्होंने बताया कि 9.22 लाख की बढ़ोतरी के साथ 15 नवंबर तक यह संख्या बढ़कर 4.53 करोड़ से अधिक हो गई। राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड का हवाला देते हुए सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 15 नवंबर की स्थिति के मुताबिक लंबित 4.53 करोड़ मामलों में से दीवानी मामलों की संख्या 1.10 करोड़ और आपराधिक मामलों की संख्या 3.43 करोड़ है।

5 हजार से अधिक पद खाली

आपको जानकर हैरानी होगी कि अधीनस्थ और जिला अदालतों में 5,000 से अधिक न्यायाधीशों की कमी है। ये पद तब खाली है जब देश में 4.53 करोड़ से अधिक केस निचली अदालतों में पेंडिंग हैं। लोअर कोर्ट ही नहीं, हाई कोर्ट को भी जजों की कमी से दो चार होना पड़ रहा है। देश के 25 उच्च न्यायालयों में 360 से अधिक पद खाली हैं।

सुप्रीम कोर्ट में 2 जजों के पद खाली

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने गुरुवार को राज्यसभा को एक सवाल के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के प्रधान न्यायाधीश सहित 34 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या वाले सुप्रीम कोर्ट में 2 जजों की कमी है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ के सीजेआई के पद से और न्यायमूर्ति हिमा कोहली के सेवानिवृत्त होने के बाद शीर्ष अदालत में ये रिक्तियां हैं। कानून मंत्री ने कहा कि 21 नवंबर की स्थिति के अनुसार, लोअर कोर्ट में 5,245 न्यायिक अधिकारियों की कमी है, जबकि उच्च न्यायालयों में 364 न्यायाधीशों की कमी है। 25 उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या कुल 1,114 है।

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(भाषा इनपुट के साथ)

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 28 November 2024 at 21:10 IST