Balasore में 48 घंटे बाद तलाशी हो गई थी बंद, फिर झाड़ियों से आई आवाज, सांस लेता हुआ मिला एक व्यक्ति
Balasore Train Accident: बालासोर ट्रेन हादसे में 278 लोगों की मौत हो गई, जबकि 1000 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
- भारत
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Balasore Train Accident: बालासोर ट्रेन हादसे में 278 लोगों की मौत हो गई, जबकि 1000 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इस हादसे से पीड़ित हर व्यक्ति की कहानी इतनी दर्दनाक है कि सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
ऐसी ही कहानी असम के रहने वाले 35 वर्षीय दुलाल मजूमदार की भी है। पुलिस की तलाशी बंद होने के बाद उसे झाड़ियों में जिंदा पाया गया तो पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। सबका यही सवाल था कि कोई 48 घंटे तक कैसे जीवित रह सकता है। वहां मौजूद लोगों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
48 घंटे तक झाड़ियों में पड़ा रहा युवक
बालासोर में भयानक ट्रेन हादसे के बाद रेस्क्यू कर्मियों ने जिंदा और मृत लोगों की तलाश में दिन-रात एक कर दिए। दो दिनों की गहन तलाशी के बाद ऐसा लगा कि अब कोई और नहीं मिलने वाला। एनडीआरएफ के डायरेक्टर अतुल करवाल के अनुसार, तलाशी खत्म होने के बाद हमारा पूरा फोकस ट्रैक को दुरुस्त करने पर था। फिर शाम करीब 5.30 बजे पुलिस कर्मियों के एक ग्रुप को झाड़ियों से कोई आवाज आई।
घटनास्थल पर मौजूद एक पुलिसकर्मी ने कहा- 'यह आवाज बहुत धीमी और चोट की वजह से कमजोर थी। 48 घंटों तक गहन तलाशी के बाद शायद झाड़ियों के नीचे वाला स्थान रेस्क्यू कर्मियों से छूट गया था। जब झाड़ियों के नीचे देखा गया तो वहां एक व्यक्ति घायल अवस्था में पड़ा मिला। सबको इस बात का आश्चर्य हो रहा था कि वो 48 घंटे तक झाड़ियों के नीचे जिंदा कैसे रहा। उसे वहां पर तुरंत प्राथमिक उपचार देकर बालासोर के हेडक्वार्टर अस्पताल में भिजवाया गया।'
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दो दिनों तक जिंदा रहना चमत्कार से कम नहीं
बालासोर अस्पताल में उस व्यक्ति की पहचान असम के 35 वर्षीय दुलाल मजूमदार के रूप में हुई। वो पांच अन्य लोगों के साथ कोरोमंडल एक्सप्रेस से यात्रा कर रहा था। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि दो दिनों तक घायल अवस्था में जिंदा रहना किसी चमत्कार से कम नहीं है।