अपडेटेड 18 February 2026 at 09:37 IST

'हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए...', वैज्ञानिक तर्क देते हुए बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत, घुसपैठियों पर भी दिया बड़ा बयान

Mohan Bhagwat Statement: RSS सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिंदू समाज को संगठित और सशक्त होने की जरूरत जताई। साथ ही उन्होंने हिंदुओं के परिवार में तीन बच्चों की आवश्यकता पर जोर दिया। वह कई मुद्दों पर अपने विचार रखते नजर आए।

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Mohan Bhagwat in Jaipur
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत | Image: ANI

RSS Chief Mohan Bhagwat in Lucknow: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार (17 फरवरी) को लखनऊ में आयोजित एक बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान वे कई मुद्दों को लेकर अपने विचार रखते नजर आए। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को संगठित और सशक्त होने की आवश्यकता है। हमको किसी से खतरा नहीं है, लेकिन सावधान रहना है।

मोहन भागवत ने लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक में यह बातें बोलीं। उन्होंने हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर भी चिंता जताई। RSS प्रमुख ने कहा कि उन्होंने लालच और जबरदस्ती हो रहे मतांतरण पर रोक लगाने की बात कही।

घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा- भागवत

उन्होंने यह भी कहा कि कहा कि घर वापसी का काम तेज होना चाहिए। जो भी लोग हिंदू धर्म में लौटें हैं, उनका ध्यान हमें ही रखना होगा। घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा। उन्हें रोजगार नहीं देना है।

‘जिस समाज में तीन से कम बच्चे होते हैं, वो…’

भागवत ने सलाह दी कि हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। उन्होंने इस दौरान वैज्ञानिकों का हवाला देते हुए कहा कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है। यह बात हमारे परिवारों में नव दंपतियों को बताई जानी चाहिए। विवाह का उद्देश्य यह होना चाहिए कि  सृष्टि आगे चले, वासना पूर्ति नहीं। इसी भावना से कर्तव्य बोध आता है।

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उन्होंने समाज को एकता का संदेश देते हुए कहा कि सद्भाव न रहने से भेदभाव होता है। हम सभी एक देश, एक मातृभूमि के पुत्र हैं। मनुष्य होने के नाते हम सब एक हैं। एक समय भेद नहीं था, लेकिन समय चक्र के चलते भेदभाव की आदत पड़ गई है, जिसे दूर करना होगा। सनातन विचारधारा सद्भाव की विचारधारा है। जो विरोधी हैं, उन्हें मिटाना है, ऐसा हम नहीं मानते। एक ही सत्य सर्वत्र है। इस दर्शन को समझ कर आचरण में लाने से भेदभाव समाप्त होगा।

यूजीसी गाइडलाइन पर क्या कहा?

यूजीसी गाइडलाइन को लेकर किए गए एक सवाल का भी उन्होंने जवाब दिया और कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए। अगर कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है। जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए। समाज में अपनेपन का भाव होगा तो ऐसी की समस्या नहीं होगी। जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुक कर ऊपर उठाना पड़ेगा। सभी अपने हैं, यह भाव मन में होना चाहिए। संघर्ष से नहीं, समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है। एक को दबाकर दूसरे को खड़ा करने का भाव नहीं होना चाहिए।

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डॉ. मोहन भागवत ने आगे यह भी कहा कि भारत निकट भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देगा। विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान भारत के पास ही है।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 18 February 2026 at 09:37 IST