'Gen-Z को जो सच्चा लगता है उससे जुड़ जाते हैं', RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान, LGBTQ+ समुदाय को लेकर बोले- वो भी इंसान, उन्हें जीने का...
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हैदराबाद में Gen-Z, लिव-इन और LGBTQ+ समुदाय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि Gen-Z स्वभाव से भावुक और सच्चे होते हैं। लिव-इन रिलेशनशिप पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि यह आधुनिकता नहीं है, यह पतन है। यह पश्चिम की अंधी नकल है।
- भारत
- 4 min read

Mohan Bhagwat Statement: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नीट पेपर लीक विवाद को लेकर हुए आंदोलन के बीच संघ प्रमुख मोहन भागवत ने Gen-Z को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि Gen Z स्वभाव से अच्छे, आसानी से ढलने वाले और भावुक होते हैं। वे बहुत ठंडे दिमाग से विचार नहीं करते। अगर उन्हें कुछ ऐसा दिखता है जो असल में सच्चा लगता है, तो वे उससे जुड़ जाते हैं।
LGBTQ+ समुदाय समाज का हिस्सा है- भागवत
कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख ने LGBTQ+ समुदाय को लेकर भी एक बड़ा और स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा कि LGBTQ+ समुदाय के लोग भी हमारे समाज का ही हिस्सा हैं और उन्हें सम्मान के साथ बराबरी का स्थान मिलना चाहिए। उन्हें किसी भी तरह की हीन भावना या अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
मोहन भागवत ने कहा, "LGBTQ+ और ऐसे सभी समुदाय मौजूद हैं और समाज में यह प्रवृत्तियां पाई जाती हैं। इनमें से कुछ जन्मजात होती हैं, जो प्रकृति से ही तय होती हैं; न तो हम और न ही वे इसे बदल सकते हैं। वे ऐसे ही पैदा हुए हैं। वहीं, कुछ प्रवृत्तियां बाद में सोच-विचार या शारीरिक झुकाव की वजह से विकसित होती हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि यह स्थिति पूरी दुनिया में मौजूद है, इसलिए हम यह दावा नहीं कर सकते कि यह हमारे यहां नहीं थी। हम भी इंसान हैं और हमारे बीच भी यह हमेशा से रहा है। हमने उनके लिए हमेशा चुपचाप व्यवस्थाएं की हैं।
Advertisement
‘समाज से अलग-थलग नहीं किया जा सकता’
अपनी परंपराओं का जिक्र करते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि हमारी संस्कृति और परंपरा ने हमेशा उनके अस्तित्व को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा, "भले ही कुछ स्थितियों का इलाज संभव हो, लेकिन जिनका इलाज नहीं हो सकता, वे भी इंसान हैं और उन्हें जीने का पूरा अधिकार है। उन्हें समाज से अलग-थलग नहीं किया जा सकता। सामाजिक जीवन के विशाल ताने-बाने में उनके लिए भी पूरी जगह है। उन्हें हीन भावना से न देखें। आज भी हम देखते हैं कि उनके अपने देवता, तीर्थ-स्थल और यहां तक कि महामंडलेश्वर भी हैं जो कुंभ मेले में आते हैं।
भागवत ने कहा कि ऐसी बातों पर बेवजह शोर-शराबा या दिखावा करने की जगह हमने उन्हें हमेशा शांति से संभाला, ताकि समाज का रवैया उनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण बना रहे और उन्हें समाज का अभिन्न अंग मानकर विवेकपूर्ण व्यवस्थाएं की जा सकें।
Advertisement
लिव-इन रिलेशनशिप के चलन पर भी दिया बड़ा बयान
लिव-इन रिलेशनशिप के बढ़ते चलन पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए शादी करना जरूरी नहीं माना गया है। अगर आप शादी नहीं करना चाहते हैं, तो इसके लिए एक अलग अनुशासन है। 'ब्रह्मचारिणी', 'ब्रह्मचारी', 'संन्यासी', 'संन्यासिनी' के लिए अलग-अलग नियम हैं। समाज उन्हें अनुशासन में रखता है। उन्हें अनुशासित रखने के लिए 'आचार्यों' ने नियम बनाए हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ऐसे लोगों की सांसारिक मामलों में कोई दिलचस्पी नहीं होती। इसलिए, वे यह सब छोड़ देते हैं।
उन्होंने कहा कि आजकल लिव-इन रिलेशनशिप का चलन है। आप देख सकते हैं कि दुनिया भर में इसके क्या नतीजे हो रहे हैं। आप आधुनिकता चाहते हैं, हमें समय के साथ बदलना भी चाहिए... लेकिन यह आधुनिकता नहीं है, यह पतन है। यह पश्चिम की अंधी नकल है।