'अगर 1.25 करोड़ हिंदू एकजुट होकर लड़ें तो...', RSS प्रमुख ने क्यों दिया ऐसा बयान? जानिए
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को संकटग्रस्त बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर एक कड़ा संदेश दिया।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को संकटग्रस्त बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर एक कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर देश की हिंदू आबादी अपने अधिकारों के लिए खड़े होकर लड़ने का फैसला करती है, तो उन्हें दुनिया भर के हिंदुओं का समर्थन मिलेगा।
मुंबई में RSS लेक्चर सीरीज के दूसरे दिन को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा, "बांग्लादेश में करीब 1.25 करोड़ हिंदू हैं। अगर वे वहीं रहने और लड़ने का फैसला करते हैं, तो दुनिया भर के सभी हिंदू उनकी मदद करेंगे।"
‘जाति देखकर हमारे यहां कार्यकर्ता नियुक्त नहीं होते’
इससे पहले उन्होंने बताया कि आरएसएस प्रमुख कौन बन सकता है? भागवत ने संघ का सरसंघचालक किसी जाति का नहीं होगा। इसके लिए ब्राह्मण, क्षत्रिय या अन्य जाति का होना जरूरी नहीं है। केवल एक शर्त है कि वो हिंदू होना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति भी सरसंघचालक बन सकता है। जाति देखकर हमारे यहां कार्यकर्ता नियुक्त नहीं होते।
देश में चार प्रकार के हिन्दू
RSS प्रमुख ने कहा, "हम लोगों का जो आपस का व्यवहार है वो सौदे पर नहीं, अपनेपन पर चलेगा। हिंदुस्तान का सनातन स्वाभाव नहीं बदलता। ऋषि मुनियों ने सोचा सब अपने हैं तो सारा ज्ञान दुनिया को देना चाहिए। भारत धर्म प्राण है, सबको साथ में चलना है। किसी को छोड़ना नहीं है। अकेले रहना है तो कोई अनुशासन नहीं है, लेकिन सबके साथ रहना है तो अनुशासन है। सृष्टि जब से चल रही है तब से धर्म से ही चल रही है। धर्मनिर्पेक्षता गलत शब्द है, पंथनिर्पेक्षता होना चाहिए।"
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उन्होंने कहा कि देश में चार प्रकार के हिन्दू हैं-
1. गर्व से कहो हम हिन्दू हैं
2. हां हम हिन्दू हैं
3. जोर से मत बोलो हम हिन्दू हैं
4. जो भूल गए हैं कि हम हिन्दू हैं
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मोहन भागवत ने कहा, "संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए। संघ को देखना है तो संघ की शाखा जाइये। संघ को समाज में अलग संगठन खड़ा नहीं करना है, क्योंकि संघ का पहला सिद्धांत है कि देश के भाग्य में परिवर्तन तब आता है जब उसका पूरा समाज एकजुट होता है।"