हम सिर्फ देश की जनता का नहीं, पूरी दुनिया का पेट भरेंगे...'रिपब्लिक भारत मंथन' में शिवराज सिंह चौहान बोले- PM मोदी के नेतृत्व में भारत बनेगा विश्व का फूड बास्केट, VIDEO
Shivraj Singh Chouhan: शिवराज सिंह चौहान ने रिपब्लिक के मंच पर सरकार का विजन 2047 बिल्कुल स्पष्ट है। भारत केवल अपने देशवासियों का पेट नहीं भरेगा, बल्कि वह दुनिया की मांग के हिसाब से खेती करेगा और एक दिन पूरी दुनिया का 'फूड बास्केट' यानी अन्न का भंडार बनकर उभरेगा।
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Shivraj Singh Chouhan On Agriculture Vision And Growth: क्या आपको याद है कि एक समय ऐसा भी था जब भारत को अपने ही लोगों का पेट भरने के लिए अमेरिका के 'लाल गेहूं' पर निर्भर रहना पड़ता था? लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में 'रिपब्लिक भारत मंथन' कार्यक्रम में यह साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अब सिर्फ अपना ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का पेट भरने के लिए तैयार है।
उन्होंने जनता की सेवा को अपना 'राम काज' बताते हुए खेती और गांव के विकास के लिए सरकार के विजन को बहुत ही विस्तार से समझाया। तो चलिए जानते हैं उनके इस खास रोडमैप की अहम बातें। साथ ही, जानेंगे भारत का विजिन।
खेती के तीन बड़े लक्ष्य हैं- सुरक्षा, पोषण और आमदनी
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार खेती को लेकर तीन मुख्य बातों पर फोकस कर रही है।
- कोई भूखा न सोए: आज भारत अन्न के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर है। इस साल हमने 377 मिलियन टन अनाज उगाया है और चावल के उत्पादन में तो हम चीन को भी पछाड़ चुके हैं।
- खाना सिर्फ पेट न भरे, बल्कि सेहत भी बनाए: आयुर्वेद के नियम "हित भुक्, मित भुक्, ऋतु भुक्" यानी सही खाएं, भूख से थोड़ा कम खाएं और मौसम के हिसाब से खाएं को अपनाते हुए सरकार ऐसे अनाज उगाने पर जोर दे रही है, जो लोगों को पूरा पोषण दें।
- किसानों की जेब में ज्यादा पैसा आए: सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य अन्नदाता की कमाई को बढ़ाना है।
किसानों की राह आसान बनाने के लिए क्या कर रही है सरकार?
आजकल मौसम का कोई भरोसा नहीं रहता। इसलिए वैज्ञानिकों ने 3200 से ज्यादा ऐसे नए बीज तैयार किए हैं, जो तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड या कम बारिश में भी अच्छी पैदावार दे सकते हैं।
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सबसे अच्छी बात यह है कि अब हमारे कृषि वैज्ञानिक सिर्फ 'एसी कमरों' या लैब में बैठकर रिसर्च नहीं कर रहे हैं। 'लैब टू लैंड' अभियान के तहत उन्हें सीधे किसानों के खेतों में भेजा जा रहा है, ताकि वे मौके पर जाकर फसल खराब होने या कीड़े लगने जैसी समस्याओं का समाधान कर सकें। इसके अलावा, फसल बीमा योजना को भी किसानों के हक में कर दिया गया है। अब अगर फसल बर्बाद होती है, तो क्लेम पास होने के एक महीने के भीतर पैसा मिल जाएगा। अगर सरकार की तरफ से देरी हुई, तो किसान को 12% ब्याज भी मिलेगा।
धरती मां की सेहत और छोटे किसानों का ख्याल
भारत में ज्यादातर किसानों के पास बहुत कम जमीन है। ऐसे छोटे किसानों के लिए सरकार 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग' का मॉडल ला रही है। इसका मतलब है कि किसान अनाज उगाने के साथ-साथ पशुपालन, मछली पालन या मधुमक्खी पालन भी करें, जिससे उनकी एक्स्ट्रा कमाई हो सके।
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साथ ही, खेतों में अंधाधुंध केमिकल डालने से हमारी धरती की सेहत खराब हो रही है और केंचुए जैसे किसानों के 'मित्र कीट' मर रहे हैं। इसलिए अब प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। एक और बड़ी राहत यह दी गई है कि आलू, प्याज और टमाटर जैसी सब्जियों को गाँव से शहर तक पहुँचाने का ट्रांसपोर्टेशन का खर्च अब केंद्र सरकार उठाएगी। इससे किसानों को सब्जियों के अच्छे दाम मिलेंगे और आम जनता को भी सब्जियां सस्ती मिलेंगी।
गांवों की तस्वीर और महिलाओं की तकदीर बदल रही है सरकार
गांवों के विकास के बिना देश का विकास अधूरा है। मनरेगा योजना का बजट बढ़ाकर अब 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कर दिया गया है। अब गांव के लोग यानी ग्राम पंचायत खुद तय करते हैं कि उनके यहां क्या विकास कार्य होंगे।
महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में 'लखपति दीदी योजना' कमाल कर रही है। देश में 3 करोड़ महिलाएं 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं और 2029 तक इसे 6 करोड़ करने का लक्ष्य है। इसके लिए महिला समूहों को बहुत ही कम ब्याज पर 1 लाख करोड़ रुपये का लोन दिया जाएगा। इसके अलावा, गरीबों के लिए 5 करोड़ नए पक्के घर भी बनाए जा रहे हैं। इसके नियम इतने आसान कर दिए गए हैं कि अगर किसी के पास टू-व्हीलर है, तो भी वह इस योजना का लाभ ले सकता है।
विजन 2047: दुनिया का पेट भरेगा भारत
अंत में, शिवराज सिंह चौहान का साफ कहना था कि कृषि और ग्रामीण विकास का काम दिल्ली के एसी कमरों से नहीं, बल्कि खेतों की धूल फांक कर ही हो सकता है।
सरकार का विजन 2047 बिल्कुल स्पष्ट है। भारत केवल अपने देशवासियों का पेट नहीं भरेगा, बल्कि वह दुनिया की मांग के हिसाब से खेती करेगा और एक दिन पूरी दुनिया का 'फूड बास्केट' यानी अन्न का भंडार बनकर उभरेगा।