सनातन से ही भगवा आसमान था और है, शिवाजी और नानक को पिता कहते हैं हम अपना, हमारे बाप का हिंदुस्तान था और है- मनोज मुंतशिर, VIDEO

Manoj Muntashir: रिपब्लिक भारत के 'मंथन 2026' में गीतकार मनोज मुंतशिर ने 'वंदे मातरम', हिंदुत्व और सनातन स्वाभिमान पर तीखा बयान देते हुए कहा कि राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के प्रति सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता है।

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Manoj Muntashir | Image: Republic

Manoj Muntashir: रिपब्लिक भारत के मेगा समिट 'मंथन 2026' में प्रसिद्ध गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर ने राष्ट्रप्रेम, हिंदुत्व और संस्कृति को लेकर एक बेहद तीखा और बेबाक बयान दिया है, जिसके बाद से राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। समिट के मंच से उन्होंने देश के प्रति वफादारी और सांस्कृतिक पहचान को लेकर सीधे सवाल खड़े किए हैं। आइए जानते हैं कि उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से क्या कुछ कहने की कोशिश की है।

देशभक्ति और 'वंदे मातरम' पर सवाल

समिट के दौरान मुंतशिर ने उन लोगों की निष्ठा पर सीधे सवाल उठाए जो हिंदुत्व या 'वंदे मातरम' के उच्चारण से असहज नजर आते हैं। भाईचारे के नाम पर चल रहे दोहरे रवैये पर निशाना साधते हुए उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "अगर आप हिंदुत्व में विश्वास नहीं करते तो माफ कीजिएगा मैं आपकी देशभक्ति पर संदेह करता हूं। अगर वंदे मातरम बोलने से आपको प्रॉब्लम है तो मुझे आपकी वफादारी पे भारत के प्रति वफादारी पे बहुत शक है।"

भाईचारे की आड़ और मातृभूमि के प्रति सम्मान पर सवाल

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुंतशिर ने समाज में अक्सर होने वाली भाईचारे की बातों और उसके पीछे के दोहरेपन पर भी बेबाकी से अपनी बात रखी। उनका मानना है कि एक तरफ जहां गले मिलने और भाई-चारे का जिक्र होता है, वहीं राष्ट्रगीत के प्रति अनिच्छा भी दिखाई जाती है। इस विरोधाभास पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "अरे जो तोले दिल के रिश्तों को बना है वो तराजू क्या? जो तोले दिल के रिश्तों को बना है वो तराजू क्या अगर दोनों ही भाई हैं तो फिर मैं क्या तो फिर तू क्या ये मिट्टी तेरी भी मां है ये मिट्टी मेरी भी मां है तो मां को सर झुकाने में मुसलमान और हिंदू..."

सनातन स्वाभिमान और 'हमारे बाप का हिंदुस्तान' 

मंच पर मनोज मुंतशिर ने अपनी कविताओं और ओजस्वी पंक्तियों के माध्यम से इतिहास और सांस्कृतिक गौरव को बेहद मुखर अंदाज में पेश किया। अपनी जड़ों और महान शख्सियतों को याद करते हुए उन्होंने कहा, "नसों में सूर्यवंशी स्वाभिमान था और है। सनातन से ही भगवा आसमान था और है। शिवाजी और नानक को पिता कहते हैं हम अपना। हमारे बाप का हिंदुस्तान था।"

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Published By:
 Kirti Soni
पब्लिश्ड