EXCLUSIVE/ ताजमहल प्यार की निशानी नहीं, रामसेतू से लेकर मांझी तक का जिक्र कर मनोज मुतंशिर ने खोला राज, रिपब्लिक के मंच से बोले- इन झूठी निशानियों ने तो...
Manoj Muntashir: मनोज मुंतशिर ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान ताजमहल और प्रेम की परिभाषा पर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने इतिहास के पन्नों को अपने नजरिए से खंगालते हुए प्रेम के प्रतीकों पर जो विचार व्यक्त किए। आइए, उनके द्वारा कही गई इन बातों को विस्तार से समझते हैं।
- मनोरंजन समाचार
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Manoj Muntashir: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रिपब्लिक भारत के मेगा समिट 'मंथन 2026' में राजनीति से लेकर मनोरंजन जगत की तमाम दिग्गज हस्तियां अपने विचार शेयर कर रही हैं। इसी मंच पर अपनी बेबाक राय के लिए मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर पहुंचे, जिन्होंने ताजमहल और प्रेम की परिभाषा पर कुछ ऐसी बातें कहीं, जिन्होंने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इतिहास के पन्नों को अपने नजरिए से खंगालते हुए, उन्होंने प्रेम के इस मशहूर प्रतीक पर जो विचार व्यक्त किए हैं, वे चर्चा का विषय बन गए हैं। आइए, विस्तार से समझते हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा क्या कहा और इसके पीछे उनका तर्क क्या है।
प्रेम या अय्याशी का प्रतीक?
मनोज मुंतशिर ने ताजमहल पर सवाल उठाते हुए कहा, "लेफ्टिस्ट लिटरेचर ने और लेफ्टिस्ट सिनेमा ने ताजमहल को पता नहीं किस एंगल से प्यार की निशानी बना दिया है, जबकि यह अय्याशी की निशानी जरूर है। जब ताजमहल बन रहा था, उस जमाने में लगभग 32 लाख लोग भुखमरी से मर रहे थे, बहुत बड़ा अकाल पड़ा था। उस दौर के 9 करोड़ रुपये शाहजहां ने खर्च किए थे एक मकबरा बनवाने में, जिससे पूरे देश की भूख मिट सकती थी। मोहब्बत की निशानी, सात बीवियों में से एक बीबी थीं मुमताज महल, जो 14वें बच्चे को जन्म देते हुए प्रसव पीड़ा से मर गईं थीं, उन्हें फैक्ट्री बना दिया था बच्चे पैदा करने की।"
पौराणिक और ऐतिहासिक प्रेम की मिसालें
मुंतशिर ने प्रेम के सच्चे स्वरूप को परिभाषित करते हुए कहा, "अगर प्यार की निशानी चाहिए, तो मैं आपको बताता हूं कि क्या है वो। प्यार की निशानी है वो समुद्र सेतु, जो भगवान राम ने अपनी प्राण-प्रिया पत्नी सीता को रावण की गिरफ्त से बचाने के लिए समुद्र के सीने पर बांध दिया था। प्यार की निशानी है चित्तौड़गढ़, जहां हमारी मां पद्मिनी राजा रतन सिंह की जलती हुई चिता में उतर गईं, लेकिन अलाउद्दीन खिलजी को अपने आंचल का एक तार भी नहीं छूने दिया।"
आधुनिक युग का अद्भुत प्रेम
अपनी बात को वर्तमान संदर्भ से जोड़ते हुए उन्होंने आगे कहा, "अगर आपको लगता है कि मैं बहुत पुरानी बात कर रहा हूं, तो प्यार की नई बात करता हूं। प्यार की निशानी है वो सड़क, जो बिहार में दशरथ मांझी ने पहाड़ काटकर बना दी। अपनी पत्नी फगुनिया के प्रेम में, जिसे उन्होंने छेनी और हथौड़ी से काटकर बनवा दिया।"