साथ नहीं तो सोना भी नहीं...ममता बनर्जी ने गिफ्ट किया था हार, काकोली घोष के बेटे गए वापस लौटाने तो किया लेने से मना, जानिए फिर क्या हुआ?
बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बेटे ममता बनर्जी के दिए हुए गिफ्ट्स को लौटाने गए थे। मगर TMC चीफ ने इसे लेने से मना कर दिया। वो देर रात तक उनके आवास के बाहर खड़े रहे। जानिए फिर क्या हुआ?
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर चल रही खींचतान अब इस हद तक पहुंच गई है कि राजनीति से हटकर आपसी रिश्ते भी खराब हो रहे हैं। बागी सासंदों की गुट की अगुवाई कर रहीं टीएमसी की वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार एक समय ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाती थीं, अब दोनों के बीच दरार यहां तक पहुंच गई है कि पुराने तोहफे भी लौटाए जा रहे हैं।
बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बेटे ममता बनर्जी के दिए हुए गिफ्ट्स को लौटाने गए थे। मगर TMC चीफ ने इसे लेने से मना कर दिया। वो देर रात तक उनके आवास के बाहर खड़े रहे और तोहफा को वापस करने की कोशिश की, मगर उनकी मुलाकात ममता बनर्जी से नहीं हो पाई। काकोली के बेटे डॉ. बैद्यनाथ घोष ने खुद इसकी जानकारी अपने X हैंडल पर दी है।
ममता को तोहफा लौटाने पहुंचे काकोली घोष के बेटे
बैद्यनाथ घोष दस्तीदार बुधवार रात को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर पहुंचे थे। उन्होंने ममता बनर्जी द्वारा अपनी शादी में उपहार स्वरूप दिए गए सोने के हार को वापस लौटाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने खुद अपने X अकाउंट पर पूरी घटना की जानकारी देते हुए पोस्ट किया। उन्होंने हार की तस्वीरें भी शेयर कीं और बताया कि वे ममता बनर्जी से मिलने और तोहफा वापस करने के लिए पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया।
बैद्यनाथ घोष ने बताया क्यों लौटाने गए तोहफा?
बैद्यनाथ ने पोस्ट में लिखा, “मेरे मन में बचपन से ही माननीय ममता बनर्जी के लिए बहुत प्यार, सम्मान और लगाव रहा है। मैं समझता हूं कि दुर्गा पूजा और मेरी शादी के समय उनसे मिले तोहफे आशीर्वाद थे। ऐसे आशीर्वाद अनमोल होते हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों में कई सांसदों और नेताओं ने मेरे बारे में बहुत दुख देने वाली और बेइज्जती वाली बातें की हैं, जबकि मैं राजनीति में शामिल नहीं हूं।”
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गिफ्ट वापस लेने से किया मना तो कर दिया दान
इसके बाद एक और पोस्ट में उन्होंने लिखा है, ”मुझे न तो अंदर जाने दिया गया और न ही वहां मौजूद पुलिस और स्टाफ ने हार और लेटर लिया। क्योंकि मैं ये तोहफे खुद वापस नहीं कर सकता, इसलिए मैंने इन्हें कालीघाट मंदिर में देवी काली को दान करने का फैसला किया है।” डॉ. बैद्यनाथ ने स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी के प्रति उनका प्यार, सम्मान और प्रशंसा पहले जैसी ही रहेगी।
कौन हैं काकोली घोष के बेटे डॉ बैद्यनाथ
बता दें कि डॉ बैद्यनाथ घोष पेशे से मनोचिकित्सक हैं और राजनीति से दूरी बनाए रखते हैं। यही वजह है कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल और संबंधित लोगों से अपील की कि वे उनके और उनके परिवार की बहुत बड़ी पर्सनल ट्रेजेडी का मजाक न उड़ाएं या उसे छोटा न समझें। हाल की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए और अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनते हुए इन तोहफों को लौटाना ही मुझे सही लगा।