राणा सांगा विवाद पर सियासी तूफान, घर पर हमला फिर भी नहीं रुके सपा सांसद रामजी लाल, बयान पर कायम, कहा- वक्त आने पर...

रामजी लाल ने घर पर हमले को लेकर रिपब्लिक भारत से बातचीत में कहा कि हमला सुनियोजित था। 22 मार्च से बराबर लोग ऐलान कर रहे थे।

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Samajwadi Party MP Ramji Lal Suman
समाजवादी पार्टी सांसद रामजी लाल सुमन | Image: R Bharat

Rana Sanga Controversy: राणा सांगा पर विवाद खड़ा करने वाले सपा सांसद रामजी लाल सुमन घर पर हुए हमले के बाद भी बयान पर अड़िग हैं। हाल ही में रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा पर टिप्पणी की थी, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। पिछले दिनों इसी विवाद के चलते रामजी लाल के घर पर हमला हुआ। कथित तौर पर कुछ अज्ञात लोगों ने घर पर पत्थर बरसाए, जिससे घर की खिड़कियों के शीशे टूट गए। हालांकि रामजी लाल राणा सांगा को लेकर दिए अपने बयान पर अभी भी कह रहे हैं कि मैंने सिर्फ ऐतिहासिक बात कही है, जिसकी समय पर पुष्टि कर देंगे।

रामजी लाल ने घर पर हमले को लेकर रिपब्लिक भारत से बातचीत में कहा कि हमला सुनियोजित था। 22 मार्च से बराबर लोग ऐलान कर रहे थे। पिछले दिन लोग बुलडोजर लेकर आए गए। कहीं ना कहीं प्रशासनिक खामियां रही हैं। तोड़फोड़ की गई। घर के शीशे तोड़ दिए और बाहर खड़ी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई। उन्होंने कहा कि मैंने सभापति को पत्र लिखा है और आग्रह किया है कि मेरे और मेरे परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

राणा सांगा विवाद पर अब क्या बोले रामजी लाल?

इसी दौरान रामली लाल सुमन ने राणा सांगा को लेकर दिए बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- '21 मार्च को जब राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा थी, तब मैंने राणा सांगा को लेकर ये बयान दिया कि उन्होंने बाबर को आमंत्रित किया था। ये ऐतिहासिक सत्य है।' बीजेपी के सवालों पर रामजी लाल ने कहा कि बीजेपी के लोगों से ज्यादा इतिहास को लेकर मुझे जानकारी है। वक्त आने पर हम उसकी पुष्टि कर देंगे।

रामजी लाल के किस बयान पर विवाद है?

उत्तर प्रदेश के आगरा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन का एक कथित वीडियो सामने आया था, जिसमें ये कहते सुना गया कि राणा सांगा एक 'गद्दार' थे। इब्राहिम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा बाबर को लाए थे। बाद में रामजी लाल सुमन ने सफाई में कहा था, 'मैंने संसद में कहा था कि बाबर को राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को हराने के लिए भारत आमंत्रित किया था। मेरा इरादा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था।' हालांकि इतिहास के पन्नों में राणा सांगा के बलिदान और बहादुरी को याद किया जाता है। राणा सांगा को संग्राम सिंह प्रथम के नाम से भी जाना जाता है। वो 1508 से 1528 तक मेवाड़ के शासक थे।

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Published By:
 Dalchand Kumar
पब्लिश्ड