कंबल में रखे 5 लाख कैश, QR कोड और...राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपी अविनाश के घर से मिला 'रामराज्य कोष' लिखा बक्सा; जानिए किसने किया उसपर दावा?

राम मंदिर निर्माण अनियमितता मामले में एक आरोपी के ठिकाने से पुलिस ने एक बक्सा बरामद किया है, जिसमें रामराज्य कोष लिखा है और QR कोड लिखा हुआ है।

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कंबल में रखे 5 लाख कैश, QR कोड और...राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपी अविनाश के घर से मिला 'रामराज्य कोष' लिखा बक्सा; जानिए किसने किया उसपर दावा? | Image: X

राम मंदिर निर्माण अनियमितता मामले में एक आरोपी के ठिकाने से पुलिस ने एक बक्सा बरामद किया है, जिसमें रामराज्य कोष लिखा है और QR कोड लिखा हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने अयोध्या के एक योग केंद्र के पास बक्सा बरामद किया है। जहां आरोपी अविनाश शुक्ला पिछले 10 साल से रह रहा था।

केंद्र में तैनात योग प्रशिक्षक सुंदर लाल ने बताया कि पुलिस ने 5 जून को छापेमारी कर सीसीटीव फुटेज की जांच की थी। उन्‍होंने बताया कि इसका वीडियो अब वायरल हुआ है। लाल ने आगे बताया कि पुलिस अविनाश को साथ लेकर आई थी और हमें उस जगह से बाहर निकाल दिया जहां वह रह रहा था। पुलिस के जाने के बाद हमें पता चला कि अविनाश के पास से 5 लाख रुपए बरामद हुए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक पुलिस को योग केंद्र से जो बक्सा मिला है उसपर लाल रंग से रामराज्‍य कोष लिखा हुआ था और उसपर एक QR कोड भी चिपका हुआ है। इस बीच पुलिस ने रूदौली कोतवाली क्षेत्र के ठाकुरान फगोली गांव के निवासी एक अन्‍य आरोपी लवकुश मिश्रा के घर पर छापा मारकर सघन तलाशी ली।

QR कोड का खाता यूको बैंक से जुड़ा

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इस बरामदगी के बाद वाराणसी के चितईपुर निवासी भास्कर सिंह ने दावा किया है कि यह संस्था उनकी है और बक्सा उन्होंने ही वहां रखा था। उन्होंने बताया कि इसका खाता अयोध्या के यूको बैंक में है। खाता सक्रिय है लेकिन उस पर लगा क्यूआर कोड पुराना व निष्क्रिय है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है।

चढ़ावा चोरी के आरोपियों की जेल में हुई नोकझोंक

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राम मंदिर की चढ़ावा चोरी के सभी आठ आरोपी जिला कारागार में बंद है। चर्चा है कि मंगलवार की उनमें आपस में किसी बात को लेकर नोकझोक व विवाद भी हुआ है। हालांकि जेल प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। वहीं, सुरक्षा के दृष्टिगत जेल प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। बैरकों के बाहर भी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।

जेल प्रशासन का प्रयास है कि आरोपी एक दूसरे से मिल ना सके। वहीं, जांच के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि जेल में निरुद्ध होने के बाद से लेकर अब तक परिजनों ने आरोपियों से सिर्फ एक बार मुलाकात की है जबकि जेल प्रशासन के नियमानुसार किसी भी विचाराधीन बंदी से सप्ताह में तीन बार मुलाकात का प्रावधान है। वहीं आरोपियों ने किसी से फोन पर भी बातचीत की इच्छा नहीं बताई है। जबकि नियमानुसार दो मोबाइल नंबरों पर कोई भी विचाराधीन बंदी बात कर सकता है। उसके पहले उसका पुलिस सत्यापन कराया जाता है।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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