राघव चड्ढा ने दो तिहाई सांसदों संग छोड़ी AAP, अकेले क्यों नहीं थामा BJP का दामन; आखिर क्या है 7 नंबर का खेल जिसके आगे फेल हुआ दल बदल कानून?

Raghav Chadha: राघव चड्ढा ने बीते दिन आधिकारिक तौर पर आम आदमी पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया। उनके इस फैसले से AAP को तगड़ा झटका लगा है।

Follow : Google News Icon  
Raghav Chadha...Who Are The 7 MPs Who Dumped AAP For BJP?
Raghav Chadha...Who Are The 7 MPs Who Dumped AAP For BJP? | Image: Republic

Raghav Chadha: कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी रहे राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी को अबतक का सबसे बड़ा झटका दे डाला है। उन्होंने शुक्रवार (24 अप्रैल) को AAP छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। उनके साथ-साथ 6 अन्य सांसदों ने भी भारतीय जनता पार्टी जॉइन की।

दरअसल, राघव चड्ढा ने बीते दिनों भाजपा में जाने का ऐलान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। इस दौरान उनके साथ अशोक मित्तल और संदीप पाठक शामिल रहे। दिलचस्प बात यह है कि अशोक मित्तल वहीं सांसद हैं जिन्हें हाल ही में राघव चड्ढा की जगह उपनेता बनाया गया था। इसके अलावा, इनके खिलाफ हाल ही में ईडी ने छापे की कार्रवाई की थी।

क्या कहता है दलबदल कानून?

आम आदमी पार्टी के सातों सांसदों के बीजेपी में शामिल होने को तकनीकी रूप से विलय कहा जा रहा है, जो कि दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए एक कानूनी कदम है।

संविधान की दसवीं अनुसूची के मुताबिक, अगर कोई सांसद अकेला पार्टी से खुद को अलग करता है, तो उसकी सदस्यता रद्द हो जाती है। लेकिन दल-बदल विरोधी कानून के तहत यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायक या सांसद एक साथ किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं तो उन पर दलबदल कानून लागू नहीं होता है।

Advertisement

राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो तिहाई सांसदों के साथ भाजपा में जाने का ऐलान किया। चड्ढा ने संदीप पाठक, अशोक मित्तल के अलावा चार अन्य सांसदों के भी अपने साथ होने का दावा किया। इनमें पंजाब से राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह, विक्रजीत सिंह साहनी और राजेंद्र गुप्ता के अलावा दिल्ली से आप की राज्यसभा सांसद स्वाती मालिवाल के नाम शामिल हैं।

राघव चड्ढा को पार्टी से क्यों नहीं निकाल पाई AAP?

आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच काफी समय से टकराव देखा जा रहा था। पार्टी पहले ही आरोप मढ़ चुकी थी कि राघव चड्ढा बीजेपी के साथ अंदरखाने समझौता कर चुके हैं। इसके बावजूद पार्टी उन्हें बार का रास्ता नहीं दिखा पाई और न ही राज्यसभा से उनकी सदस्यता खत्म करवा पाई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों अरविंद केजरीवाल के हाथ बंधे रहे।

Advertisement

इसके पीछे की असली वजह यह है कि अगर कोई पार्टी अपने सांसद को पार्टी से निकाल भी दे, तो भी वह सांसद संसद में अपनी सदस्यता बरकरार रख लेता है। आम आदमी पार्टी यह बिल्कुल नहीं चाहती थी कि राघव चड्ढा पार्टी से बाहर रहकर भी सांसद बने रहें। इसी बीच राघव चड्ढा ने दो-तिहाई बहुमत जुटाकर पूरे मामले को ही रफा-दफा कर दिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर अपनी संसद सदस्यता को सुरक्षित रख लिया।

अब राज्यसभा में AAP के कितने सांसद बचे?

आम आदमी पार्टी के पास राज्यसभा में कुल 10 सांसद थे, जिनमें से 7 पंजाब और 3 दिल्ली से हैं। ऐसे में इस टूट का सबसे गहरा असर पंजाब पर पड़ सकता है। अब पंजाब से राज्यसभा में 'आप' का केवल एक सांसद (बलबीर सिंह सीचेवाल) बचे हैं।

यह भी पढ़ें: Raghav Chadha: राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के AAP छोड़ने पर Anna Hazare का आया रिएक्शन, किसे ठहराया दोषी?
 

Published By :
Priyanka Yadav
पब्लिश्ड