Raghav Chadha: राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के AAP छोड़ने पर Anna Hazare का आया रिएक्शन, किसे ठहराया दोषी?
Raghav Chadha: राघव चड्ढा के साथ 6 और सांसदों के AAP छोड़ बीजेपी में शामिल होने पर अन्ना हजारे ने पार्टी की लीडरशिप पर दोष मढ़ा है। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को कोई न कोई दिक्कत रही होगी, तभी ये कदम उठाया।
- भारत
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Anna Hazare on Raghav Chadha: राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों के आम आदमी पार्टी को दिए झटके पर सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को कोई तकलीफ रही होगी, तभी उन्होंने ये कदम उठाया। उन्होंने कहा कि अगर AAP ने सही किया होता तो ये लोग ऐसा नहीं करते।
राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी ने शुक्रवार (24 अप्रैल) को आम आदमी पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया है।
‘कोई न कोई तकलीफ रही होंगी'
अन्ना हजारे महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में थे। पत्रकारों ने जब उनसे सांसदों के इस कदम पर सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति की अपनी राय है। राघव चड्ढा और बाकी नेताओं को पार्टी के अंदर कोई न कोई दिक्कतें आई होंगी, इसलिए वे चले गए। कुछ न कुछ कारण तो रहा होगा।
अन्ना ने आगे कहा कि अगर कोई पार्टी से अलग होता है तो दोष उनका है। पार्टी सही चलती तो नहीं जाते। स्वार्थ आ गया तो भूल जाते हैं। समाज और देश को भूल गए और सत्ता और पैसे के पीछे पिट गए, तो इसके कारण गड़बड़ी हो गई।
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राघव के साथ कई सांसदों ने छोड़ी पार्टी
हाल ही में आम आदमी पार्टी ने बड़ा एक्शन लेते हुए राघव चड्ढा को राज्यसभा के डिप्टी लीडर के पद से हटाया था। उनकी जगह पार्टी ने अशोक मित्तल को ये जिम्मेदारी सौंपी। हैरानी की बात ये है कि राघव के साथ अशोक ने भी AAP को अलविदा कह दिया।
राघव ने क्या बताई इस्तीफे की वजह?
राघव ने खुद को 'गलत पार्टी में सही आदमी' बताया। उन्होंने AAP से अपने इस्तीफे के पीछे सबसे बड़ा कारण पार्टी के सिद्धांतों से विचलन को बताया है। राघव ने कहा कि 15 साल पहले जिस आम आदमी पार्टी को उन्होंने और केजरीवाल ने बड़ी उम्मीदों और नैतिकता के साथ शुरू किया था, वह अब पूरी तरह से अपनी दिशा भटक चुकी है। पार्टी अब देशहित या जनहित के बजाय निजी फायदों को प्राथमिकता देने लगी है।
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उन्होंने कहा कि वे अब एक ऐसी पार्टी का हिस्सा नहीं रह सकते जो अपने ही बनाए गए उसूलों को ताक पर रख चुकी है, जिससे उनका मोहभंग होना स्वाभाविक था।