'प्रधानमंत्री को हटाने का प्रस्ताव लाइए ना, हम नहीं कहेंगे कि अफसोसजनक है लेकिन...', अमित शाह ने लोकसभा में ऐसा क्यों कहा?

मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पेश करने के बाद गरमागरम बहस हुई।

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Union Home Minister Amit Shah
Union Home Minister Amit Shah | Image: ANI

मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पेश करने के बाद गरमागरम बहस हुई। प्रस्ताव पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में अपने विचार रखे। उन्होंने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि स्पीकर किसी भी पार्टी पद से ऊपर होते हैं और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संसद में ऐसा प्रस्ताव लाया गया है।

आपको बता दें कि यह प्रस्ताव कांग्रेस MP मोहम्मद जावेद ने पेश किया था और संसदीय नियमों के तहत 50 से ज्यादा MPs ने इसका समर्थन किया। कुल मिलाकर, 118 विपक्षी MPs ने स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए प्रस्ताव पर साइन किए।

क्या बोले अमित शाह?

अमित शाह ने कहा, मैं बताना चाहता हूं कि 75 साल से इन दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है, लेकिन आज विपक्ष ने इस साख पर एक प्रकार से सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष—दोनों के लिए सदन के जो स्पीकर होते हैं, वे कस्टोडियन होते हैं। इसलिए नियम बनाए गए हैं। यह सदन कोई मेला नहीं है; यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। जो बातें सदन के नियम परमिट नहीं करते, उस तरह से बोलने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो।

उन्होंने आगे कहा कि हम भी विपक्ष में रहे हैं, तीन बार लोकसभा के स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव आया,  मगर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए विपक्ष में रहते हुए कभी लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव नहीं लाए। हमने स्पीकर पद की गरिमा को संरक्षण करने का काम किया है और स्पीकर से हमारे कानूनी अधिकार और संवैधानिक अधिकारों के लिए संरक्षण की मांग भी करी है।

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'PM को हटाने का प्रस्ताव लाइए ना...'

अमित शाह ने कहा कि कोई विशेषाधिकार नहीं है। जो लोग इस मुगालते में जीते हैं, वे और छोटा छोटा छोटा होते जाते हैं। जब आप स्पीकर पर सवाल उठाते हो, तब आप विधायी चेतना और गरिमा पर सवालिया निशान लगाते हो। प्रधानमंत्री को हटाने का प्रस्ताव लेकर आइए ना, हम नहीं कहेंगे कि अफसोसजनक है। हम मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जवाब देंगे। प्रधानमंत्री को भी हटाया ही जा सकता है। स्पीकर को हटाने के लिए असाधारण परिस्थितियों में किया जा सकता है। यह रोजमर्रा की चीज नहीं है। जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लंबित हो, तब पीठासीन कार्यवाही का संचालन नहीं करेंगे।

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Published By:
 Kunal Verma
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