Waqf Bill: 'बंगाल में आकर कहूंगा और छाती पर ठोकर कहूंगा, ये राजनीतिक अखाड़ा नहीं है', जब लोकसभा में अमित शाह को आया गुस्सा

Waqf Bill: वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के समर्थन में बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह का रौद्र रूप देखने को मिला।

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Amit Shah
Amit Shah | Image: Sansad TV

Waqf Bill: वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के समर्थन में बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह का रौद्र रूप देखने को मिला। हुआ यूं कि जब अमित शाह चर्चा के दौरान अपनी बात रख रहे थे उसी दौरान टीएमसी के सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया और टिप्पणी करने लगे, जिसके बाद गृहमंत्री ने कहा कि बंगाल में जाकर कहूंगा, यह राजनीतिक हिसाब किताब का अखाड़ा नहीं है। छाती पर ठोककर कहूंगा, हमारी ज्यादा सीट आएंगी।

गृहमंत्री ने कहा कि 2013 में 1913 से लेकर 2013 तक बोर्ड का कुल एकड़ में भूमि 18 लाख एकड़ थी, 2013 से 2025 तक जो 2013 में कानून बना उसका परिणाम यह आया और नई 21 लाख एकड़ भूमि बढ़ गई अब 39 लाख एकड़ जो भूमि है उसमें से 21 लाख एकड़ 2013 के बाद की है और यह कह रहे हैं कि इसका दुरुपयोग नहीं हो रहा है। लीज पर दी गई संपत्तियां 20,000 थी, जो 2025 में रिकॉर्ड के हिसाब से शून्य हो गई हैं। तो मान्यवर यह संपत्तियां कहां गई, मान्यवर बेचदी गईं, किसकी इजाजत से बेची गईं?

भारत सरकार का कानून है सबको मानना पड़ेगा- अमित शाह

गृहमंत्री ने लोकसभा में कहा कि मान्यवर यहां तो एक सदस्य ने कह दिया माइनॉरिटी कानून को स्वीकार नहीं करेगी, क्या  धमकाना चाहते हो भाई, संसद का कानून है सबको मानना पड़ेगा। स्वीकार नहीं करेंगे इसका क्या मतलब है, कैसे बोल सकते हैं हम कानून को स्वीकार नहीं करेंगे, यह कानून भारत सरकार का है, हर एक पर बंधन करता है और उसको स्वीकार करना पड़ेगा।

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मान्यवर यह कह रहे थे कि कोई गड़बड़ियां नहीं हुई इसी बीच विपक्ष के सांसद हंगामा करने लगे 2013 मैं अन्यायी कानून आया...विपक्षी सांसद शोर करने लगे जवाब में बीजेपी के सांसद भी खड़े हो गए। तभी अमित शाह ने कहा, "भाई-भाई करने दो ना यह डरे हुए हैं, यह 26 के कारण डरे हुए हैं शांत हो जाएंगे और कोई कारण नहीं है, चुनाव जो है ना अक्टूबर में, बैठ जाओ बैठ जाओ भाई बैठ जाओ।"

वक्फ में कोई गैर मुस्लिम व्यक्ति आएगा ही नहीं- अमित शाह

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अमित शाह ने कहा कि भारत का जहां तक सवाल है दिल्ली में सल्तनत काल के प्रारंभ में पहली बार वक्फ अस्तित्व में आया। अंग्रेजों के जमाने में 1863 के धार्मिक दान अधिनियम से चलता था, बाद में चैरिटेबल प्रॉपर्टी एक्ट 1890 से चला उसके बाद 1913 में मुसलमान वक्फ वैलिडिटी एक्ट अस्तित्व में आया। तब तक यह सारी प्रक्रियाएं चैरिटेबल एक्ट के तहत चलती थी। आजादी के बाद इस एक्ट को 1954 में वक्फ के केंद्रीकरण के लिए बदल गया। 1995 में वक्फ न्याय अधिकरण और वक्फ बोर्ड की स्थापना हुई। वक्फ परिषद और वक्फ बोर्ड 1995 से आए। यह पूरा झगड़ा जो चल रहा है कि आपने नॉन मुस्लिम को रख दिया, गैर मुस्लिम को रखा। यह झगड़ा वक्फ में दखल करने का है। पहले तो वक्फ में कोई भी गैर इस्लामिक सदस्य आएगा ही नहीं, यह स्पष्ट समझ लीजिए न मुतवल्ली गैर इस्लामिक होगा ना वाकिफ गैर इस्लामिक होगा, वहां कोई ऐसा प्रावधान नहीं है जो धार्मिक संस्थाओं का संचालन करते हैं उसमें कोई गैर मुस्लिम व्यक्ति रखने का प्रावधान किया भी नहीं है और हम करना भी नहीं चाहते हैं।

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Published By:
 Deepak Gupta
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