तहव्वुर राणा को भारत लाने पर BJP थपथपा रही अपनी पीठ, तो संजय राउत को लगी मिर्ची, कहा- तुरंत फांसी नहीं होगी बिहार चुनाव...
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने राणा को तुरंत फांसी पर लटकाने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसा नहीं किया जाएगा।
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Sanjay Raut on Tahawwur Rana: 2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11 आतंकी हमला) के आरोपी तहव्वुर राणा को भारत लाया जा चुका है। तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं मिल रही है। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने राणा को तुरंत फांसी पर लटकाने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसा नहीं किया जाएगा।
जाहिर है कि मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ता के भारत लाए जाने पर पक्ष और विपक्षी दल भी इसका स्वागत कर रहे हैं। लेकिन इन दलों का यह भी कहना है कि सरकार सिर्फ क्रेडिट लेने के लिए इसका प्रचार कर रही है।
‘तहव्वुर राणा को फांसी अभी नहीं बल्कि…’
आज यानि 10 अप्रैल को संजय राउत ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि तहव्वुर राणा को तुरंत फांसी दी जानी चाहिए। लेकिन उसे बिहार चुनाव के दौरान फांसी दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि तहव्वुर राणा को भारत लाने के लिए पिछले 16 सालों से लड़ाई चल रही है। इसकी शुरुआत कांग्रेस के शासन के दौरान हुई थी। इसलिए राणा को भारत लाने का क्रेडिट किसी को नहीं लेना चाहिए।
भारत प्रत्यर्पित होने वाला पहला आरोपी नहीं- राउत
शिवसेना नेता ने आगे कहा कि भारत प्रत्यर्पित होने वाला तहव्वुर राणा कोई पहला आरोपी नहीं है। इससे पहले 1993 के सीरियल ब्लास्ट के आरोपी अबु सलेम को भी भारत प्रत्यर्पित किया जा चुका है। उन्होंने आगे मांग करते हुए कहा कि भगोड़े नीरव मोदी और मेहुल चौकसी को भी भारत प्रत्यर्पित किया जाए।
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देर शाम भारत लाया गया राणा
बताते चलें कि आज (10 अप्रैल) शाम करीब 6.30 तहव्वुर राणा को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। उसे लाने वाले विशेष विमान ने कड़ी सुरक्षा के बीच गुरुवार की शाम पालम एयरपोर्ट पर लैंड किया। फिलहाल उसे NIA कोर्ट में पेश किया गया है।
कौन हैं तहव्वुर राणा?
64 वर्षीय तहव्वुर राणा पाकिस्तान में जन्मा कनाडाई नागरिक है और 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी के करीबी सहयोगी है, जो एक अमेरिकी नागरिक है। तहव्वुर राणा को प्रत्यर्पण से बचने के अपने आखिरी प्रयास के बाद भारत लाया गया है क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने उसके आवेदन को खारिज कर दिया था।