Mahakumbh: 50 करोड़ लोगों ने डुबकी लगाकर प्रदेश को दिया बूस्टर डोज, इकोनॉमी को मिले 3 लाख करोड़, CM योगी ने समझाया गुणा-गणित

Mahakumbh: महाकुंभ में 50 करोड़ श्रद्धालुओं की आस्था की डुबकी ने यूपी की अर्थव्यवस्था को दिया बूस्टर डोज। सीएम योगी ने गणित समझाया।

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UP CM Yogi Adityanath
सीएम योगी आदित्यनाथ | Image: PTI

Prayagraj Mahakumbh 2025 : 144 वर्षों के इंतजार के बाद प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया गया। महाकुंभ के इस आयोजन ने महारिकॉर्ड भी बना लिया है। एक तरफ संगम में आस्था की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, तो वहीं विपक्ष की राजनीति भी बरकरार रही। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया है कि महाकुंभ के आयोजन में कितना खर्च हुआ और कितने का लाभ।

महाकुंभ के आयोजन की लागत और उससे हुए लाभ का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा, "उत्तर प्रदेश की अकेली अर्थव्यवस्था को महाकुंभ प्रयागराज के माध्यम से तीन लाख करोड़ रुपए की नई बढ़ोतरी होने जा रही है। जो लोग उंगली उठाते हैं कि 5-6 हजार करोड़ खर्च कर दिए कुंभ में, ये कुंभ में ही नहीं किए हैं, ये प्रयागराज शहर के विनिर्माण में भी खर्च किए हैं। कुंभ के आयोजन में कुल 1500 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। और बदले में अगर यूपी को 3 लाख करोड़ का लाभ होता हो, और यहां की अकर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती हो, तो ये यूपी के नौजवानों जनताजनार्दनों और नए भारत के लिए अत्यंत उपयुक्त और समीचीन है।"

महाकुंभ में बना महारिकॉर्ड

महाकुंभ में श्रद्धालुओं का महारिकॉर्ड बन गया है। संगम में डुबकी लगाने वालों का आंकड़ा 50 करोड़ पार हो गया। महाकुंभ में अब तक 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया। महाकुंभ दुनिया का पहला आयोजन बन गया है, जहां 50 करोड़ से अधिक लोग प्रत्यक्ष सहभागी बने। इतिहास के किसी आयोजन में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के सहभागी होने का प्रमाण नहीं है। चीन और भारत की आबादी को छोड़ दें, तो महाकुंभ में उतने लोग शामिल हुए, जितनी दुनिया के बड़े देशों की जनसंख्या तक नहीं है। अमेरिका, रूस, इंडोनेशिया, ब्राजील, पाकिस्तान और बांग्लादेश की जनसंख्या से अधिक लोगों ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई।

महाकुंभ में रिकॉर्ड को लेकर क्या बोले CM योगी?

वहीं सीएम योगी ने इसे लेकर लिखा, "भारत की आध्यात्मिकता, एकात्मता, समता और समरसता के जीवंत प्रतीक महाकुंभ 2025, प्रयागराज में अब तक पावन त्रिवेणी में 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। भारत की कुल जनसंख्या में 110 करोड़ नागरिक सनातन धर्मावलंबी हैं और उसमें से 50 करोड़ से अधिक नागरिकों द्वारा संगम में पवित्र स्नान उत्कृष्ट मानवीय मूल्यों की श्रेष्ठतम अभिव्यक्ति महान सनातन के प्रति दृढ़ होती आस्था का परिचायक है। वास्तविक अर्थों में भारत की लोक आस्था का यह अमृतकाल है।"

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उन्होंने आगे लिखा कि एकता और आस्था के इस 'महायज्ञ' में पवित्र स्नान का पुण्य लाभ प्राप्त करने वाले सभी पूज्य साधु-संतों, धर्माचार्यों, कल्पवासियों एवं श्रद्धालुओं का हार्दिक अभिनंदन! मानवता के इस महोत्सव के सकुशल आयोजन में सहभागी महाकुंभ मेला प्रशासन, स्थानीय प्रशासन, पुलिस प्रशासन, स्वच्छताकर्मियों, स्वयंसेवी संगठनों एवं धार्मिक संस्थाओं, नाविकों तथा महाकुंभ से जुड़े केंद्र व प्रदेश सरकार के सभी विभागों को हृदय से साधुवाद तथा प्रदेश वासियों को बधाई! भगवान तीर्थराज प्रयाग सभी की मनोकामना पूर्ण करें!

स्वच्छता का विश्व रिकॉर्ड बनाने की दिशा में बढ़ा महाकुंभ

तीर्थराज प्रयागराज की धरती ना केवल भव्य महाकुंभ रूप में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का साक्षात्कार कर रही है, बल्कि संगमनगरी विश्व रिकॉर्ड का भी साक्षी बनने जा रही है। एक बयान में इसकी जानकारी दी गयी है। आधिकारिक बयान के मुताबिक, महाकुंभ में शुक्रवार को 50 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम और गंगा में स्नान के विश्व रिकॉर्ड के साथ ही स्वच्छता की दिशा में भी एक अनूठा रिकॉर्ड बनने जा रहा है। इसके तहत, 300 से अधिक स्वच्छताकर्मियों ने शुक्रवार को एक साथ अलग-अलग घाटों पर गंगा की सफाई की।

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महाकुंभ में बनाया स्वच्छता का विश्व रिकॉर्ड

स्वच्छता के विश्व रिकॉर्ड के लिए मेला प्राधिकरण की ओर से सभी निर्धारित प्रक्रिया को अपनाया गया। अब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि इस पूरी प्रक्रिया का सत्यापन करेंगे और इस रिकॉर्ड को प्रमाणित करने के बाद इसका प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे। प्रमाण पत्र प्राप्त होने के बाद यह अपने आप में एक अनूठा रिकॉर्ड होगा, जहां एक साथ इतने सफाई कर्मियों ने अलग-अलग घाटों पर आधे घंटे से ज्यादा समय तक घाटों पर सफाई का अभियान चलाया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुसार, प्रयागराज में जारी महाकुंभ की वैश्विक छवि को देखते हुए सरकार ने नदी की सफाई को लेकर जन जागरुकता अभियान छेड़ा हुआ है जिसकी वजह से महाकुंभ में आ रहे करोड़ों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन, निर्मल और स्वच्छ जल में स्नान कर रहे हैं।

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Published By:
 Kanak Kumari Jha
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