जुम्मे पर MLA को नहीं मिलेगी 2 घंटे की छुट्टी, CM हिमंता के फैसले पर भड़के मौलाना बरेलवी, कहा- उनका मुस्लिम मुखालिफ चेहरा...
Namaz Break: असम विधानसभा में करीब 30 मुस्लिम विधायक हैं, लेकिन BJP के पास संख्या बल है। नमाज ब्रेक की प्रथा 1937 में शुरू हुई थी जिसे अब स्थगित कर दिया गया है।
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Assam Namaz Break: असम विधानसभा में अब मुस्लिम विधायकों को नमाज पढ़ने के लिए दो घंटे का ब्रेक नहीं मिलेगा। ब्रिटिश काल से चले आ रहे इस नियम को असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने खत्म कर दिया है। असम विधानसभा में मुस्लिम विधायकों को शुक्रवार के दिन नमाज अदा करने के लिए 2 घंटे का अल्पविराम मिलता था। इस परंपरा को चालू बजट सत्र के दौरान खत्म कर दिया गया।
असम सरकार ने यह फैसला सदन के पिछले सत्र (30 अगस्त, 2024) में लिया गया था, लेकिन इसे इस सत्र से लागू किया गया। असम सरकार के इस फैसले ने तूल पकड़ लिया है। मुस्लिम समुदाय से आने वाले नेता और मौलाना इसका विरोध कर रहे हैं। आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सरकार के फैसले पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि "असम की BJP सरकार ने एक बार फिर मुस्लिम मुखालफत का इजहार करते हुए 90 साल पुरानी परंपरा को खत्म कर दिया है। अगर चुने हुए विधायक ही अपने धार्मिक अधिकारों की अदायगी नहीं कर सकते है तो आम मुसलमानों के बारे में क्या कहा जा सकता है?"
1937 में शुरू हुई प्रथा
असम विधानसभा में करीब 30 मुस्लिम विधायक हैं, लेकिन BJP के पास संख्या बल है। अगस्त, 2024 में इस फैसले पर सीएम हिमंता ने कहा था कि "विधानसभा के सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से इसका समाधान निकाला है। ये प्रथा 1937 में शुरू हुई थी और अब इसे स्थगित कर दिया गया है। इस फैसले में विशेष समुदाय के विधायक शामिल थे। ये फैसला सिर्फ मेरी तरफ से नहीं लिया गया, विधानसभा ने ये फैसला लिया है।"
असम विधानसभा में जुम्मा ब्रेक पर रोक क्यों?
असम विधानसभा में मुस्लिम विधायकों को जुम्मे की नमाज पढ़ने के लिए 2 घंटे का ब्रेक दिया जाता था। विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली नियम समिति ने नियम में संशोधन करने का सर्वसम्मति से फैसला लिया, ताकि शुक्रवार के दिन भी सदन की कार्यवाही अन्य दिनों की तरह ही संचालित हो सके। एक आधिकारिक बयान में कहा गया था, "इस औपनिवेशिक प्रथा को खत्म करके इतिहास रचा गया है, जिसका उद्देश्य समाज को धार्मिक आधार पर विभाजित करना था।"
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1937 से शुरू हुई इस प्रथा में मुस्लिम विधायकों को नमाज पढ़ने के लिए शुक्रवार के दिन सुबह 11 बजे 2 घंटे के लिए सदन को स्थगित कर दिया जाता था, ताकि मुस्लिम विधायक नमाज अदा कर सकें और दोपहर के भोजन के बाद काम फिर से शुरू हो। 2024 में विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी ने इस मामले पर ध्यान दिया और संविधान की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति को देखते हुए प्रस्ताव दिया कि राज्य विधानसभा को बिना किसी स्थगन के किसी अन्य दिन की तरह शुक्रवार को अपनी कार्यवाही संचालित करनी चाहिए। इसके बाद विधानसभा की प्रक्रिया के नियमों में इस नियम को खत्म करने का प्रस्ताव नियम समिति के समक्ष रखा गया था। नियम समिति ने सर्वसम्मति से इस नियम को हटाने पर सहमति व्यक्त की थी।
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