अपडेटेड 27 March 2025 at 17:32 IST

'राज्य सरकार असमर्थ है...' औरंगजेब विवाद अब केंद्र सरकार तक पहुंचा; कब्र को लेकर कर डाली मांग

शिवसेना नेता राहुल शेवाले ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत से मुलाकात की है। राहुल शेवाले ने केंद्रीय मंत्री को एक चिट्ठी भी पकड़ाई है।

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shivsena leader rahul shewale has written a letter to union minister gajendra shekhawat
औरंगजेब की कब्र पर केंद्र पर मामला पहुंचा। | Image: R Bharat

Aurangzeb Controversy: औरंगजेब की कब्र का विवाद फिर सुलग रहा है। पिछले दिनों नागपुर में उसी विवाद के चलते हिंसा देखी जा चुकी है, जब हिंदू संगठन के विरोध प्रदर्शन के बीच दूसरे समुदाय के लोग भिड़ गए थे। फिलहाल शिवसेना के एक नेता ने औरंगजेब की कब्र के विवाद को तूल लिया है।

शिवसेना नेता राहुल शेवाले ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत से मुलाकात की है। राहुल शेवाले ने केंद्रीय मंत्री को एक चिट्ठी भी पकड़ाई है, जिसमें औरंगजेब के मकबरे को राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की सूची से हटाने की मांग की गई है। चिट्ठी में लिखा है- 'औरंगजेब एक रूढ़िवादी इस्लामी शासक था, जिसके शासनकाल में धार्मिक असहिष्णुता और उत्पीड़न के ऐतिहासिक विवरण दर्ज हैं। उसके अत्याचार के सबसे उल्लेखनीय उदाहरणों में से एक 1689 में छत्रपति संभाजी महाराज की क्रूर हत्या थी, जिन्हें इस्लाम धर्म अपनाने से इनकार करने पर 40 दिनों तक अमानवीय यातनाएं दी गईं।'

चिट्टी के जरिए औरंगजेब कब्र को लेकर मांग

मांग रखते हुए शिवसेना नेता राहुल शेवाले ने पत्र में लिखा- 'औरंगजेब के मकबरे को वर्तमान में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल के रूप में मान्यता मिली हुई है। इस कब्र को हटाने की व्यापक मांग के बावजूद राज्य सरकार कोई कार्रवाई करने में असमर्थ है, क्योंकि ये स्थल ASI के अधिकार क्षेत्र में आता है। प्रावधानों के अनुसार, ऐसे किसी भी स्मारक को सूची से हटाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। मैं आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि आप इस मामले पर गौर करें और संबंधित अधिकारियों को औरंगजेब के मकबरे को राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की सूची से हटाने का निर्देश दें।'

RSS ने भी दिया औरंगजेब विवाद पर जवाब

पिछले दिन औरंगजेब विवाद को लेकर आरएसएस ने भी एक बयान दिया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने रविवार को गंगा-जमुनी संस्कृति के पैरोकारों की आलोचना की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह धर्म का मामला नहीं है, बल्कि भारत की परंपराओं के अनुसार काम करने वाले व्यक्तियों के साथ पहचान बनाने का मामला है।

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होसबोले ने उन ऐतिहासिक शख्सियतों को नायक बनाने पर सवाल उठाया, जो भारत के मूल्यों के खिलाफ थे। उन्होंने दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम बदलकर अब्दुल कलाम रोड किए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि इस बदलाव के पीछे एक कारण था। आरएसएस महासचिव ने कहा, ‘अतीत में बहुत सारी घटनाएं हुई हैं। दिल्ली में एक औरंगजेब रोड था, जिसका नाम बदलकर अब्दुल कलाम रोड कर दिया गया। इसके पीछे कुछ कारण था। औरंगजेब के भाई दारा शिकोह को नायक नहीं बनाया गया। गंगा-जमुनी संस्कृति की वकालत करने वालों ने कभी दारा शिकोह को आगे लाने के बारे में नहीं सोचा। क्या हम किसी ऐसे व्यक्ति को नायक बनाने जा रहे हैं जो भारत के मूल्यों के खिलाफ था या हम उन लोगों के साथ जाने जा रहे हैं, जिन्होंने इस भूमि की परंपराओं के अनुसार काम किया?’

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Published By : Dalchand Kumar

पब्लिश्ड 27 March 2025 at 17:14 IST