17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की उपस्थिति 51% रही जबकि राष्ट्रीय औसत 67%... जब अमित शाह ने लोकसभा में खोली राहुल गांधी की पोल तो हो गया बवाल

Amit Shah Parliament Speech: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी बजट सत्र के दौरान अक्सर विदेश चले जाते हैं। 25वीं केंद्रीय बजट में भी चर्चा में भाग नहीं लिया। फिर कहते हैं बोलने नहीं दिया जाता।

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Amit Shah Parliament Speech
Amit Shah Parliament Speech | Image: Sansad TV

Amit Shah Parliament Speech: संसद का बजट सत्र अपने दूसरे चरण में भी लगातार गरमागरमी देखने को मिल रही है। बुधवार को लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी लोकसभा में अपने विचार रखे। उन्होंने इस दौरान राहुल गांधी की उपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बोलने का मौका आता है तो वे जर्मनी-इंग्लैंड घूमते हैं।

‘ये कोई सामान्य घटना नहीं’

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने कहा, ‘ये कोई सामान्य घटना नहीं है, करीब 4 दशक बाद एक बार फिर से लोकसभा अध्यक्ष के सामने अविश्वास प्रस्ताव आया है। ये संसदीय राजनीति और सदन दोनों के लिए अफसोस-जनक घटना है क्योंकि स्पीकर किसी दल के नहीं होते, सदन के होते हैं।’

‘बोलने के वक्त जर्मनी-इंग्लैंड घूमते हैं’

गृह मंत्री ने राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने नहीं देने वाले आरोप पर कहा कि जब बोलने का मौका आता है तो वे जर्मनी-इंग्लैंड घूमते हैं, और जब होते हैं तो नियम से बोलना नहीं आता है।

अमित शाह ने नेता प्रतिपक्ष की उपस्थिति पर कहा कि राहुल गांधी बजट सत्र में भी शामिल नहीं हुए हैं। 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52 फीसदी और 17वीं लोकसभा में 51 फीसदी ही थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 67 प्रतिशत रही।

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शाह ने कहा- एक भी विधेयक पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। 25वीं केंद्रीय बजट में भी चर्चा में भाग नहीं लिया। उनकी पार्टी 4 दशक के बाद ऐसा प्रस्ताव लेकर आई है, उस पर भी राहुल गांधी ने हिस्सा नहीं लिया। फिर कहते हैं बोलने नहीं दिया जाता। मुझे लगता है वे बोलना ही नहीं चाहते।

‘सदन नियम से चलता है’

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए सदन के जो स्पीकर होते हैं, वे कस्टोडियन होते हैं इसलिए नियम बनाए गए हैं। यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। यहां इतने वरिष्ठ सदस्य बैठे हैं,  क्यों नहीं सिखाते उन्हें। इतना सीखा दें तो समस्या का वहीं समाधान हो जाए। वे कहते हैं, हमें बोलने नहीं देते हैं।’

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Published By:
 Sujeet Kumar
पब्लिश्ड