'देश में आर्थिक संकट आया नहीं, लाया गया...', PM मोदी की अपील पर भड़के अखिलेश यादव, पूछा- आपदा में अवसर खोजने की शक्ति चली गई?
अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में आर्थिक संकट आया नहीं बल्कि लाया गया है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि क्या अब आपदा में अवसर खोजने की शक्ति चली गई है।
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Akhilesh Yadav: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे में लगातार दूसरी बार देशवासियों से अपील की, जिसमें सोने की खरीद कम करने, वर्क फ्रॉम होम, स्कूलों में ऑनलाइन क्लास, फर्टिलाइजर का सीमित उपयोग और 'वोकल फॉर लोकल' को बढ़ावा देने की बाते शामिल रहीं। अब इस पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं।
अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में आर्थिक संकट आया नहीं बल्कि लाया गया है। सपा प्रमुख का यह बयान पीएम मोदी की अपील के कुछ देर बाद आया है।
भाजपा अपने भ्रष्टाचार से आर्थिक संकट लाई- अखिलेश
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा कि देश में आर्थिक संकट खुद नहीं आया है, बल्कि भाजपा ने अपने भ्रष्टाचार के कारण इसे लाया है।
'भ्रष्टाचार से इतना पेट भर गया कि अब बचकर…'
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या अब आपदा में अवसर खोजने की शक्ति चली गई है। भ्रष्टाचार से इतना पेट भर गया है कि अब वे बचकर निकलना चाहते हैं।
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PM मोदी ने दूसरी बार अपील में क्या-क्या कहा?
पीएम मोदी ने गुजरात के वडोदरा में देसवासियों से अपील करते हुए कहा, 'मैं अपने देश के हर नागरिक से अपील करता हूं कि वे पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल जितना हो सके कम करें। मेट्रो का इस्तेमाल करें, इलेक्ट्रिक बसों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें और कारपूलिंग को बढ़ावा दें। जिनके पास कार है, उन्हें एक ही गाड़ी में ज्यादा लोगों को साथ ले जाना चाहिए। डिजिटल टेक्नोलॉजी ने अब इतनी सारी चीजें आसान बना दी हैं कि टेक्नोलॉजी की मदद हमारे लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी। यह जरूरी है कि सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के दफ्तरों में वर्चुअल मीटिंग और 'वर्क फ्रॉम होम' को प्राथमिकता दी जाए।'
उन्होंने आगे कहा, 'देश का बहुत सारा पैसा सोने के आयात पर भी विदेश चला जाता है। इसलिए मैं आप सभी देशवासियों से आग्रह करूंगा कि जब तक हालात सामान्य न हो जाएं, तब तक सोने की खरीदारी टाल दें। आज समय की मांग है कि हम 'वोकल फॉर लोकल' को एक जन-आंदोलन बना दें। विदेशी सामान के बजाय, स्थानीय उत्पादों को अपनाएं। अपने गांव, अपने शहर और अपने देश के उद्यमियों को सशक्त बनाएं।'