'या तो पढ़ा नहीं बिल या फिर BJP ने गुमराह किया', मायावती ने किया महिला आरक्षण का समर्थन तो अखिलेश यादव ने साधा निशाना

UP News: बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी विधानसभा में बुलाए गए विशेष सत्र की सराहना की थी, जिस पर अब अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने मायावती के बयान पर निशाना साधा है।

Follow : Google News Icon  
Akhilesh Yadav and Mayawati
Akhilesh Yadav and Mayawati | Image: X

Akhilesh Yadav on Mayawati Statement: महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी संग्राम अब तक थमा नहीं है। गुरुवार (30 अप्रैल) महिला आरक्षण के मुद्दे पर यूपी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था। बसपा प्रमुख मायावती ने इस सत्र का स्वागत किया, तो वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन पर ही निशाना साध दिया। अखिलेश ने मायावती पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने शायद महिला आरक्षण बिल पढ़ा नहीं होगा।

अखिलेश यादव ने क्या कहा? 

सपा प्रमुख ने कहा कि मायावती ने या तो यह बिल पढ़ा नहीं होगा या फिर बीजेपी ने उन्हें गुमराह कर दिया है, इसलिए उन्होंने विशेष सत्र का स्वागत किया। अखिलेश ने कहा कि महिला आरक्षण बिल कानून बन गया है। भाजपा सोची समझी रणनीति के तहत विपक्ष को बदनाम करने का षड्यंत्र कर रही है। नई संसद में 2023 में जब महिला आरक्षण बिल आया था, तब सभी दलों ने उसे उसे समर्थन देकर पास कराया था।

मायावती ने किया था विशेष सत्र बुलाने के फैसले का स्वागत

इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने यूपी विधानसभा में बुलाए गए एक दिवसीय विशेष सत्र के फैसले का स्वागत किया था। साथ ही उन्होंने महिला आरक्षण बिल का भी समर्थन किया। उन्होंने एक पोस्ट में लिखा था, "महिलाओं को राजनीति में उचित भागीदारी देने की पहल के तहत देश की संसद लोकसभा व राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला काफी लम्बी जद्दोजहद के बावजूद भी आगे नहीं बढ़ पाया है, यह अति-दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण व अति-चिन्तनीय भी है। इस संदर्भ में यूपी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है जिसका  बीएसपी स्वागत करती है तथा महिला आरक्षण का समर्थन भी करती है।"

चुनाव के समय बिल पर अखिलेश ने उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर लगातार सरकार पर हमलावर हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महिला आरक्षण संशोधन बिल के लिए संसद का सत्र ऐसे समय में बुलाया जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव चल रहे थे। देश के इतिहास में पहली बार महिला आरक्षण में संशोधन और परिसीमन जैसा महत्वपूर्ण बिल चुनाव के मध्य में लेकर आयी। भाजपा विपक्षी दलों के सांसदों को चुनाव से चार-पांच दिन दूर करना चाहती थी।

Advertisement

उन्होंने आगे कहा कि डिलिमिटेशन के खिलाफ सभी विपक्षी दल एक हो गए, जिससे भाजपा के धोखे का पर्दाफाश हो गया। अपनी हार को छिपाने के लिए भाजपा महिलाओं को मुद्दा बनाना चाहती है। भाजपा नारी वंदन का नारा बनाना चाहती है। महिला मुद्दा बनीं रहे, नारी नारा बन जाए, इसी साजिश और षडयंत्र के तहत सड़कों पर और सदन में झूठा प्रचार कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: TMC को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के काम में दखल देने से किया इनकार
 

Advertisement
Published By :
Ruchi Mehra
पब्लिश्ड