वन नेशन वन इलेक्शन पर PM मोदी को अखिलेश के बाद मायावती का भी साथ, कहा- हमारा स्टैंड पॉजिटिव लेकिन..
बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने केंद्र सरकार के वन नेशन वन इलेक्शन के फैसले का समर्थन किया है।
- भारत
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One Nation One Election: मोदी सरकार के 'एक देश एक चुनाव' के फैसले को अखिलेश यादव के बाद अब मायावती का भी साथ मिल गया है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया है।
मायावती ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, 'एक देश, एक चुनाव' की व्यवस्था के तहत देश में लोकसभा, विधानसभा व स्थानीय निकाय का चुनाव एक साथ कराने वाले प्रस्ताव को केन्द्रीय कैबिनेट द्वारा आज दी गयी मंजूरी पर हमारी पार्टी का स्टैण्ड सकारात्मक है, लेकिन इसका उद्देश्य देश व जनहित में होना जरूरी।
सपा ने किया वन नेशन वन इलेक्शन का समर्थन
अखिलेश यादव की पार्टी ने केंद्र सरकार के फैसले के समर्थन किया है। सपा प्रवक्ता रविदास मल्होत्रा ने कहा कि हम लोग चाहते हैं देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ में हों। वन नेशन, वन इलेक्शन को लागू करने से पहले सभी विपक्षी पार्टियों और सभी मुख्यमंत्रियों की बैठक होनी चाहिए। समाजवादी पार्टी देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। अखिलेश यादव, राहुल गांधी और विपक्षी दलों के नेताओं की सहमति से इसपर आगे कार्रवाई होनी चाहिए। हम लोग चाहते हैं देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ में हों लेकिन बीजेपी की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है। अगर वो चाहते हैं कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हो तो सर्वदलीय बैठक बुलाने का काम करें, 2027 में यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं उसी के साथ केंद्र की सरकार संसद भंग कर एकसाथ चुनाव करा दें।
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One Nation One Election के क्या हैं फायदे
एक देश एक चुनाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि चुनाव का खर्च घट जाएगा। अलग-अलग चुनाव कराने पर हर बार भारी-भरकम राशि खर्च होती है। बार-बार चुनाव होने से प्रशासन और सुरक्षा बलों पर बोझ पड़ता है, क्योंकि उन्हें हर बार चुनाव ड्यूटी करनी पड़ती है। एक बार में चुनाव निपट जाने पर केंद्र और राज्य सरकारें कामकाज पर फोकस कर सकेंगी। बार-बार वह इलेक्शन मोड में नहीं जाएंगी और विकास के कामों पर ध्यान दे सकेंगी।
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626 पन्नों की रिपोर्ट
यह कमेटी इसी साल 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। 191 दिनों तक विशेषज्ञों और स्टेकहोल्डर्स से चर्चा के बाद कमेटी ने 18 हजार 626 पन्नों की रिपोर्ट दी है। इसमें सभी राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल बढ़ाकर 2029 तक करने का सुझाव दिया गया है, जिससे लोकसभा चुनाव के साथ ही इनके चुनाव भी कराए जा सकें।