एक को एक के विरूद्ध खड़ा करना राजनीति लेकिन एक हैं तो सेफ हैं ये है असली राष्ट्रनीति; रिपब्‍लिक के मंच से मनोज मुतंशिर ने समझा दिया एकता का साइंस

Manoj Muntashir: रिपब्लिक भारत 'मंथन समिट 2026' में गीतकार, कवि, पटकथा और संवाद लेखक मनोज मुतंशिर भी शामिल हुए, जहां उन्होंने एकता का साइंस बेहद ही बारीकी और संजीदगी से समझाया।

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Pitting one against another is politics but standing united ensures safety that true statecraft Manoj Muntashir
रिपब्‍लिक के मंच से मनोज मुतंशिर ने समझा दिया एकता का साइंस | Image: Republic

Manoj Muntashir: रिपब्लिक भारत के मेगा 'मंथन समिट 2026' का शानदार आगाज हुआ। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रिपब्लिक के 'Manthan Summit 2026' का आयोजन किया गया है। रिपब्लिक मीडिया के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का आरंभ किया।

इस कार्यक्रम में भारतीय सिनेमा के गीतकार, कवि, पटकथा और संवाद लेखक मनोज मुतंशिर भी शामिल हुए, जहां उन्होंने एकता का साइंस समझाते हुए बताया कि एक को एक के विरूद्ध खड़ा करना राजनीति, लेकिन एक हैं तो सेफ हैं ये है असली राष्‍ट्रनीति। इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘ताजमहल को पता नहीं किसने बता दिया कि ये मोहब्बत की निशानी है। वह तो अय्याशी की निशानी है। मंच से प्यार की असली निशानी का अर्थ भी बताया।’

एक हैं तो सेफ हैं ये है असली राष्ट्रनीति

रिपब्लिक भारत के मेगा 'मंथन समिट 2026' के मंच से मनोज मुतंशिर ने कई मुद्दों पर चर्चा करते हुए एक का महत्व बताया। इस दौरान उन्होंने कहा एकता का साइंस क्या? इसके बाद उन्होंने कहा 'एक और एक मिलकर दो हो जाए, ये गणित है।'

आगे उन्होंने कहा 'एक और एक मिलकर 11 हो जाए। ये संगठन है। एक और एक मिलकर एक ही रह जाए, ये प्रेम हैं। एक और एक मिलकर शून्य हो जाए ये एक अध्यात्म है। एक को एक से मिलने न दिया जाए, यह कूटनीति है। एक को एक के विरुद्ध खड़ा कर दिया जाए, ये राजनीति है और एक हैं, तो सेफ हैं। ये राष्ट्रनीति है।'

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ताजमहल को लेकर मनोज मुतंशिर ने क्या कहा?

ताजमहल को लेकर मनोज मुतंशिर से मंच से कहा 'ताजमहल को पता नहीं किसने बता दिया कि ये मोहब्बत की निशानी हैं। वह तो अय्याशी की निशानी है।' आगे उन्होंने कहा अगर प्यार की निशानी चाहिए, तो प्यार की निशानी वो सेतु है, जिसे प्रभु श्री राम ने अपनी प्राण प्रिय सीता को बचाने के लिए समुद्र के सीने पर बांध दिया था। वो है प्यार की निशानी।'

आगे उन्होंने कहा प्यार की निशानी है बिहार की वो सड़क जिसे दशरथ मांझी ने पहाड़ को काटकर एक सड़क बना दिया। अपनी पत्नी फगुनिया ने लिए एक विशाल जैसे पहाड़ को काटकर दिया। वो है प्यार की निशानी।'

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Published By:
 Sahitya Maurya
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