भाजपा कार्यालय पर जड़ा ताला, नेशनल हाईवे किया जाम... दतिया उपचुनाव में BJP ने नरोत्तम मिश्रा का काटा टिकट तो सड़क पर उतरे कार्यकर्ता, VIDEO
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए BJP ने जैसे ही पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया, दतिया की सियासी फिजा में भूचाल आ गया।
- भारत
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दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए BJP ने जैसे ही पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया, दतिया की सियासी फिजा में भूचाल आ गया। पार्टी के इस फैसले से नाराज कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया।
खबर फैलते ही सैकड़ों की तादाद में बीजेपी कार्यकर्ता और नरोत्तम मिश्रा के समर्थक जिला कार्यालय के सामने जमा हो गए। देखते ही देखते यह भीड़ हजारों में तब्दील हो गई और कार्यकर्ताओं ने नेशनल हाइवे को जाम कर दिया।
दतिया के बाजार बंद
विरोध की आंच बाजार तक भी पहुंची। नाराज कार्यकर्ताओं और व्यापारियों के समर्थन में दतिया के बाजार बंद कर दिए गए। बीजेपी जिला कार्यालय पर भी प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा देखा गया, जिसके चलते कार्यालय का सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ।
गौरतलब है कि नरोत्तम मिश्रा 2008 से लगातार दतिया से विधायक चुने जाते रहे थे, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती के हाथों उन्हें करीब 7,742 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। भारती को बैंक फ्रॉड मामले में अदालत से सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता समाप्त हो गई, जिसके चलते यह सीट खाली हुई और उपचुनाव की नौबत आई।
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BJP ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा
नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत से ही नरोत्तम मिश्रा दतिया में एक्टिव नजर आ रहे थे। उन्होंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था और लगातार जनसंपर्क कार्यक्रमों और सदस्यता अभियानों के जरिए संगठन को मजबूत करने में जुटे थे। उनके समर्थकों को पूरा भरोसा था कि पार्टी एक बार फिर उन पर ही दांव लगाएगी।
लेकिन पार्टी आलाकमान ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा। आशुतोष तिवारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे नेता हैं और बीजेपी में संभागीय संगठन मंत्री और मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष का दायित्व संभाल चुके हैं। पार्टी ने ब्राह्मण चेहरे को बरकरार रखते हुए नेतृत्व के स्तर पर बदलाव का संकेत देने की कोशिश की है।
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फिलहाल दतिया में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन की नजर हालात पर बनी हुई है, वहीं बीजेपी नेतृत्व के सामने चुनाव से ठीक पहले संगठन में उठे इस असंतोष को शांत करना बड़ी चुनौती बनकर सामने आ गया है।