अपडेटेड 6 February 2026 at 11:51 IST
Pariksha Pe Charcha: माता-पिता मेरे सपनों को गंभीरता से नहीं लेते तो क्या करें? PM मोदी ने सुनाई बैलगाड़ी वाली कहानी, दी ये सलाह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'परीक्षा पे चर्चा' के दौरान बच्चों को प्रेरित करने के लिए बैलगाड़ी वाली कहानी सुनाई। एक स्टूडेंट मृदुल वर्मन ने कहा था कि, 'छोटे घर और काम-काज के बीच पढ़ना मुश्किल हो जाता है, माता-पिता उतनी गंभीरता से हमारे सपनों को नहीं लेते। इस सवाल पर प्रधानमंत्री ने ये कहानी सुनाई। पढ़ें PM मोदी ने बच्चों को और क्या क्या सलाह दी।
- भारत
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PM Modi on Pariksha Pe Charcha 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'परीक्षा पे चर्चा' में कई बच्चों के सवालों के जवाब दिए और अपनी बातों से उन्हें प्रेरित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने पैटर्न फॉलो करने वाले सवाल पर खुद की जिंदगी का उदाहरण दिया। साथ ही कुछ कहानियां भी सुनाई। बातचीत के दौरान एक स्टूडेंट मृदुल वर्मन ने कहा कि, छोटे घर और काम-काज के बीच पढ़ना मुश्किल हो जाता है, माता-पिता उतनी गंभीरता से हमारे सपनों को नहीं लेते। इस सवाल पर प्रधानमंत्री ने बैलगाड़ी वाली कहानी सुनाई और खास सलाह दी। 'परीक्षा पे चर्चा' के दौरान देश के सभी स्कूल ऑनलाइन इस कार्यक्रम से जुड़े।
PM मोदी ने सुनाई बैलगाड़ी वाली कहानी
PM मोदी ने कहा कि, 'एक पिताजी बैलगाड़ी में अपना सामान लेकर जा रहे थे, बच्चा सामान के उपर बैठा हुआ था। अपनी किताब खोल रहा था, अपने कंफर्ट की चिंता नहीं कर रहा था, कुछ लोग होते हैं न, कमरा ठीक नहीं हो तो नींद नहीं आती। ये जो सोच है न कि हम सुविधा होने पर ही पढ़ेंगे, यह गलत है। बोर्ड परीक्षा में छोटे-छोटे गांवों के बच्चे सफल होते हैं। मैं ब्लाइंड क्रिकेट टीम से मिला था, मेरी आंखों में आंसू आ गए थे।
मैंने भी अपनी पैटर्न बदला, लेकिन मूल पैटर्न को नहीं छोड़ा- PM
गुजरात की एक स्टूडेंट्स पीएम मोदी से कहा कि सभी हमारी चिंता करते हैं, लेकिन टीचर्स, पेरेंट्स और स्टूडेंट्स का भी पैटर्न अलग-अलग होता है। इस पर पीएम मोदी जवाब दिया कि, ‘ यह जिंदगी भर का सफर होगा। मैं पीएम बन गया हूं, फिर भी कोई न कोई आकर मुझे सिखाता रहता है कि अपना काम कैसे करना है।'
पीएम मोदी आगे कहा कि जो आपको सुझाव देते हैं उसे ध्यान से सुनों-समझने की कोशिश करो और उसमें आपको लगता है कि मेरा पैटर्न तो है लेकिन उसमें एक चीज जोड़ दूं तो अच्छा होगा। लेकिन किसी के कहने पर मत जोड़ो, अपने अनुभव पर जोड़ो। PM मोदी ने कहा- 'जब परीक्षा पे चर्चा मैंने शुरू किया, तो एक पैटर्न था। अब धीरे-धीरे में उसे बदलता जा रहा हूं, इस बार मैंने अलग-अलग राज्यों में बच्चों से बात की। मैंने भी अपनी पैटर्न बदली, लेकिन मूल पैटर्न को नहीं छोड़ा।’
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जो छूट जाता है उसे कैसे कवर करें? PM मोदी ने दिया जवाब
एक बच्चे ने पूछा का टीचर पढ़ाती है तो कई बार छूट जाता है, उसे कैसे कवर करें, इस पर PM मोदी ने बच्चों को जवाब दिया साथ ही टीचरों को भी सलाह दी, उन्होंने कहा- टीचर का प्रयास रहना चाहिए कि स्टूडेंट्स की यह स्पीड है तो उनकी एक स्पीड सिर्फ एक कदम आगे रहनी चाहिए। जो पहुंच में हो लेकिन पकड़ में न हो। टीचर का प्रयास रहना चाहिए कि स्टूडेंट्स की यह स्पीड है तो उनकी एक स्पीड सिर्फ एक कदम आगे रहनी चाहिए। जो पहुंच में हो लेकिन पकड़ में न हो। अगर पचास कदम आगे चले जाएंगे तो स्टूडेंट को लगेगा ये निकल गया। इसका तरीका यह है कि मान लीजिए जनवरी के तीसरे सप्ताह में वो इतिहास का कोई पाठ पढ़ाने वाले हैं तो जनवरी की एक तारीख बता दें कि जनवरी के पहले वीक में ये पाठ पढ़ाऊंगा, दूसरी वीक में ये, तीसरे वीक में... टीचर कहेंगे कि मैं पढ़ाऊं उससे पहले पढ़ना शुरू कर दो। उसके बाद जब पाठ बढ़ाएंगे तो ज्यादा समझ आएगा।
मार्क्स जरूरी या स्किल्स?
पीएम मोदी ने कहा कि हर चीज में संतुलन होना चाहिए। एक तरफ झुकोगे तो गिरोगे ही गिरोगे। स्किल में भी 2 प्रकार के स्किल होते हैं। एक है लाइफ स्किल्स और दूसरा है प्रोफेशनल्स स्किल्स। इसमें यह भी पूछा गया कि किस पर ध्यान देना चाहिए, मुझे दोनों पर ध्यान देना चाहिए। बिना अध्ययन ऑब्जर्वेशन और बिना ज्ञान के कोई भी कोचिंग कर सकता है क्या? कौशल की शुरुआत तो ज्ञान से ही होती है, सबसे महत्वपूर्ण कम नहीं है। शिक्षा और स्किल्स अलग नहीं हैं, स्किल्स जीवन में अनिवार्य हैं।
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दो तरह की स्किल्स होती हैं- लाइफ स्किल्स और प्रोफेशनल स्किल्स
PM मोदी ने कहा कि पढ़ाई, आराम, स्किल्स और हॉबीज में बैलेंस रखें। यही ग्रोथ की कुंजी है। वैसे स्किल्स भी दो तरह की होती हैं। लाइफ स्किल्स और प्रोफेशनल स्किल्स। उन्होंने कहा- ‘मेरा मानना है कि दोनों साथ-साथ चलती हैं। तो, स्किल की शुरुआत नॉलेज से होती है।’
Published By : Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड 6 February 2026 at 11:51 IST