अपडेटेड 25 January 2026 at 21:31 IST

तरपा के जादूगर को पद्म श्री, आदिवासी संस्कृति की धुन बनी राष्ट्रीय सम्मान, पालघर के वारली वादक भीकलिया धिंडा पद्म श्री से होंगे सम्मानित

पालघर के वारली आदिवासी समुदाय के 90 वर्षीय तरपा वादक भीकलिया लाडकिया धिंडा को कला क्षेत्र में पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने दुर्लभ तरपा संगीत को संरक्षित रखा और युवाओं को सिखाया। धिंडा ने खुशी जताते हुए कहा कि यह पुरस्कार आदिवासी संस्कृति, जव्हार तहसील और पालघर जिले का सम्मान है।

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Palghar Warli maestro Bhiklya Ladkya Dhinda to be honoured with Padma Shri padma awards 2026
भीकलिया धिंडा पद्म श्री से होंगे सम्मानित | Image: X

Padma Awards 2026 : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को पद्म पुरस्कार 2026 की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। पालघर जिले के वारली आदिवासी समुदाय के गौरवशाली संगीतकार भीकलिया लाडकिया धिंडा (Bhiklya Ladkya Dhinda) को कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान दुर्लभ तरपा वाद्य यंत्र और उसकी संगीतमय परंपरा के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में उनके आजीवन समर्पण को समर्पित है।

90 साल के भीकलिया लाडकिया धिंडा महाराष्ट्र के आदिवासी समुदाय से हैं और वे तरपा वाद्य यंत्र के माहिर वादक हैं। तरपा एक पारंपरिक आदिवासी वाद्य यंत्र है, जो कद्दू (बोटल गार्ड) और बांस से बनाया जाता है। यह वाद्य विशेष रूप से वारली और अन्य आदिवासी समुदायों की संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

कौन हैं भीकलिया लाडकिया धिंडा?

भीकलिया लाडकिया धिंडा पालघर जिले के जव्हार तहसील के दूरस्थ वालवंडा गांव में रहते हैं। तरपा संगीत के सर्वश्रेष्ठ ज्ञात वादकों में से एक माने जाते हैं। तरपा की मधुर और रहस्यमयी ध्वनि वारली जनजाति की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग है, जो प्रकृति, देवताओं की पूजा और सामुदायिक उत्सवों में बजाई जाती है। धिंडा ने इस प्राचीन कला को जीवंत रखा है और युवा पीढ़ी को इसे सौंपने का प्रयास किया है, जिससे यह दुर्लभ परंपरा विलुप्त होने से बची है।

'मैं सरकार का आभारी हूं...'

इस पुरस्कार की घोषणा से आदिवासी संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। पद्म श्री से सम्मान मिलने से भीकलिया लाडकिया धिंडा बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि तरपा संगीत के लिए पद्म श्री पुरस्कार की घोषणा की गई है। इस पुरस्कार ने आदिवासी समुदाय, जव्हार तहसील और पालघर जिले को सम्मान दिलाया है। तरपा हमारी आदिवासी संस्कृति का एक तोहफा है और पद्म श्री पुरस्कार मिलना मेरे जीवन में बहुत बड़ा सम्मान है। मैं सरकार का आभारी हूं।"

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113 पद्म श्री पुरस्कार घोषित

भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर को संजोने वाले ऐसे 'अनसंग हीरोज' को पद्म पुरस्कार प्रदान करना राष्ट्र की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है। पद्म पुरस्कारों में ग्रासरूट स्तर पर असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है। 2026 के पद्म पुरस्कारों में कुल 113 पद्म श्री पुरस्कार घोषित किए गए हैं, जिनमें कई ऐसे नाम हैं जो समाज के कम चर्चित क्षेत्रों से हैं। भीकलिया लाडकिया धिंडा की यह सफलता आदिवासी समुदाय के लिए प्रेरणा बनेगी और तरपा संगीत की मधुर लहरें दूर-दूर तक फैलती रहेंगी।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 25 January 2026 at 21:31 IST