तहव्वुर राणा को अमेरिका ने भारत को किन शर्तों पर सौंपा? कौन-कौन अपराध के लिए मिल सकती है सजा... जानिए सबकुछ
मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा को अमेरिका ने भारत को किन-किन शर्तों पर सौंपा है चलिए जानते हैं...
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Tahawwur Rana: मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाया जा रहा है जिसे लेकर राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। भारत में राणा के खिलाफ सिर्फ उस मामले में मुकदमा चलाया जा सकता है जो उसने प्रत्यर्पण के वक्त अमेरिकी कोर्ट के सामने लिखकर पेश किया था।
तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाने के बाद 1997 के भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत सरकार सख्त नियमों और शर्तों से बंधी है। भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि दोनों देशों के बीच कानूनी सहयोग का चिन्ह तो है ही, साथ ही यह भी सुनिश्चित करती है कि जिस शख्स का प्रत्यर्पण किया जा रहा हो उसके अधिकारों का सम्मान हो। ऐसे में तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण में क्या क्या शर्तें हैं चलिए जानते हैं...
आखिर क्या-क्या शर्तें…
इस संधि के तहत राणा को सिर्फ उस विशेष अपराध के लिए हिरासत में लिया जा सकता है जिसके लिए उसका प्रत्यर्पण हुआ है। किसी अन्य अपराध के लिए मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं होगा। 'विशेषता का नियम' इसे सुनिश्चित करता है कि राणा के अधिकारों का उल्लंघन न हो। भारत सरकार को सिर्फ उस अपराध से संबंधित कार्रवाई करने की अनुमति मिलती है जिसके लिए उसका प्रत्यर्पण हुआ है।
तहव्वुर राणा को अन्य देश को सौंपने की अनुमति?
इसके अलावा भारत राणा को किसी और देश को नहीं सौंप सकता। भारत के लिए यह अनिवार्य है कि राणा को किसी अन्य देश को सौंपने से पहले अमेरिका की अनुमति प्राप्त की जाए। यह नियम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए भारत को बाध्य करता है।
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यह भी महत्वपूर्ण है कि तहव्वुर राणा को प्रत्यर्पण के बाद भारत में निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलेगा जैसा कि भारतीय कानून और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के तहत अपेक्षित है। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके साथ किसी भी तरह का भेदभाव न हो और उसकी कानूनी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी हो।
प्रत्यर्पण की प्रक्रिया सस्ती या महंगी?
जान लें कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया काफी मंहगी हो सकती है क्योंकि अनुरोध करने वाला देश इसका खर्च उठाता है। हालांकि, राणा के मामले में खर्च की कोई जानकारी अभी तक नहीं मिली है। साथ ही, भारत को अपनी 1962 की प्रत्यर्पण अधिनियम के अनुसार भी कार्रवाई करनी होगी, ताकि कोई लापरवाही न हो और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख पर कोई सवाल न खड़े हो।
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इस प्रकार से तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण एक सख्त नियमों से बंधी प्रक्रिया है, जिसे भारत को पूरी पारदर्शिता और कानूनी कड़ाई के साथ निभाना होगा।
कौन हैं तहव्वुर राणा?
64 वर्षीय तहव्वुर राणा पाकिस्तान में जन्मा कनाडाई नागरिक है और 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी के करीबी सहयोगी है, जो एक अमेरिकी नागरिक है। तहव्वुर राणा को प्रत्यर्पण से बचने के अपने आखिरी प्रयास के बाद भारत लाया जा रहा है क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने उसके आवेदन को खारिज कर दिया था।