BREAKING: निठारी कांड में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने की खुदकुशी, हरिद्वार में चाय की दुकान में रस्‍सी से लटकती मिली लाश

देशभर में चर्चित निठारी कांड के आरोपित रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है।

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BREAKING: निठारी कांड में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने की खुदकुशी, हरिद्वार में चाय की दुकान में रस्‍सी से लटकती मिली लाश | Image: X

देशभर में चर्चित निठारी कांड के आरोपित रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है। कोली कुछ दिन से हरिद्वार में चाय बेचने का काम कर रहा था। उसका शव चाय की दुकान में रस्सी के सहारे फंसे पर लटका मिला है। बताया जा रहा है कि सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था। सुरेंद्र कोली मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण में मंगरुखाल गांव का रहने वाला था।

आज सुबह हरिद्वार शहर कोतवाली की सप्त ऋषि पुलिस चौकी पर सूचना मिली कि सप्त सरोवर रोड लालमाता मंदिर के सामने सुरेंद्र कोली ने चाय की दुकान में फांसी लगा ली है। प्रथम दृष्टया पुलिस पारिवारिक क्लेश को आत्महत्या की वजह मान रही है। हालांकि, आत्महत्या के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस जांच कर रही है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटाई है। सुरेंद्र कोली निठारी कांड का आरोपी था और इस मामले में अदालत ने उसे दोषी ठहराया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में रिहा किया था

11 नवंबर साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था। 2006 में निठारी हत्या व दुष्कर्म कांड सामने आया था। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई थी। 2015 में न्यायालय ने फांसी की सजा में राहत देते हुए उम्रकैद सुनाई थी।

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क्या था निठारी कांड, जानें टाईमलाइन

2004–2006: बच्चों की रहस्यमय गुमशुदगी

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नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव से दर्जनों बच्चे और युवतियां रहस्यमय तरीके से गायब होने लगे, लेकिन स्थानीय पुलिस ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।

29 दिसंबर 2006: नरकंकाल और मामले का खुलासा

व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर की D-5 कोठी के पीछे नाले से बच्चों के 8 कंकाल और कपड़े बरामद हुए। खुदाई में आगे कई और कंकाल मिलने से हड़कंप मच गया।

जनवरी 2007: CBI जांच और गिरफ्तारियां

भारी जनाक्रोश के बाद जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई। पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली के खिलाफ हत्या, बलात्कार और साक्ष्य मिटाने के 19 मामले दर्ज किए गए।

2009–2021: ट्रायल कोर्ट की सजाएं

गाजियाबाद सीबीआई अदालत ने सुरेंद्र कोली को 12 से अधिक मामलों में मौत की सजा सुनाई और पंढेर को भी फांसी की सजा दी गई।

16 अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बरी का फैसला

हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच में गंभीर लापरवाही और सबूतों की कमी का हवाला देते हुए पंढेर और कोली को फांसी की सजा वाले मामलों में बरी कर दिया।

11 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट से अंतिम रिहाई का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की सुधारात्मक (Curative) याचिका स्वीकार करते हुए अंतिम लंबित मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।

अदालत के फैसले के मुख्य आधार

अदालतों ने पाया कि साक्ष्यों की कड़ियों को कानूनी मानकों के अनुसार साबित नहीं किया जा सका और नाले से बरामदगी की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई।

अंग तस्करी के पहलू को नजरअंदाज करना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि जांच एजेंसियों ने मामले में उभरे संभावित मानव अंग तस्करी के कोण की जांच नहीं की, जो जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ था।

स्वीकारोक्ति की कानूनी अमान्यता

हिरासत के दौरान लिया गया कोली का इकबालिया बयान बिना ठोस फोरेंसिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के अदालत में टिक नहीं सका। सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में गहरा दुख व्यक्त किया कि जांच एजेंसियों की विफलताओं के कारण इस जघन्य हत्याकांड के असली गुनहगारों की पहचान कानूनी रूप से स्थापित नहीं हो सकी।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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