अपडेटेड 7 February 2026 at 17:14 IST

'भारत में हिन्दू ही हैं और कोई है ही नहीं,' RSS के 100 वर्ष पर बोले मोहन भागवत- BJP संघ की पार्टी नहीं, संघ के स्वयंसेवक उसमें हैं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “संघ यात्रा के 100 वर्ष-नए क्षितिज” के कार्यक्रम में कई मशहूर हस्तियों ने शिरकत की। इस दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि फिर से गुलामी नहीं आएगी, इस बात की गारंटी क्या है?

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RSS Chief Mohan Bhagwat to Address Mumbai’s Eminent Personalities at Centenary Lecture Series
RSS Chief Mohan Bhagwat | Image: X

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “संघ यात्रा के 100 वर्ष-नए क्षितिज” के कार्यक्रम में कई मशहूर हस्तियों ने शिरकत की। इस दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि फिर से गुलामी नहीं आएगी, इस बात की गारंटी क्या है? हमारे समाज में कमी है कि हम में एकता नहीं है।

उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को कोई दूसरा काम नहीं करना है। सब अच्छे कामों की पूर्णता जिससे होगी, वो करने का काम संघ है। BJP संघ की पार्टी नहीं है। संघ के स्वयंसेवक उसमें हैं।

क्या-क्या बोले मोहन भागवत?

मोहन भागवत ने कहा, "संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए। संघ को देखना है तो संघ की शाखा जाइये। संघ को समाज में अलग संगठन खड़ा नहीं करना है, क्योंकि संघ का पहला सिद्धांत है कि देश के भाग्य में परिवर्तन तब आता है जब उसका पूरा समाज एकजुट होता है।"

उन्होंने आगे कहा, "जो आज हमारा विरोध करते हैं वो भी इस ही समाज एक अंग हैं। उनको भी हमें संगठित करना ही है। हमको सबको संगठित करना है। भारत में हिन्दू ही हैं और कोई है नहीं। हिन्दू कहने से हम उसको रिलिजन ना मानें। हिन्दू एक विशिष्ट समुदाय का नाम नहीं है। हिन्दू शब्द बाहर से आया है। कहते हैं कि पारसी और ईरान से आया। संत गुरु नानक जी ने सबसे पहले हिन्दू शब्द का प्रयोग किया।"

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'धर्मनिर्पेक्षता गलत शब्द है, पंथनिर्पेक्षता होना चाहिए'

RSS प्रमुख ने कहा, "हम लोगों का जो आपस का व्यवहार है वो सौदे पर नहीं, अपनेपन पर चलेगा। हिंदुस्तान का सनातन स्वाभाव नहीं बदलता। ऋषि मुनियों ने सोचा सब अपने हैं तो सारा ज्ञान दुनिया को देना चाहिए। भारत धर्म प्राण है, सबको साथ में चलना है। किसी को छोड़ना नहीं है। अकेले रहना है तो कोई अनुशासन नहीं है, लेकिन सबके साथ रहना है तो अनुशासन है। सृष्टि जब से चल रही है तब से धर्म से ही चल रही है। धर्मनिर्पेक्षता गलत शब्द है, पंथनिर्पेक्षता होना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि देश में चार प्रकार के हिन्दू हैं-

1. गर्व से कहो हम हिन्दू हैं 
2. हां हम हिन्दू हैं 
3. जोर से मत बोलो हम हिन्दू हैं 
4. जो भूल गए हैं कि हम हिन्दू हैं

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मोहन भागवत ने कहा कि भारत के मुसलमान और भारत के ईसाई बाकी दुनिया के जैसे मुसलमान और ईसाई जैसे नहीं हैं। 

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Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 7 February 2026 at 17:14 IST