'कार्यकर्ता धूप में दरी बिछाएं, नेता AC में हाथ हिलाएं...' अखिलेश के 'लग्जरी रथ' को लेकर संजय निषाद ने साधा निशाना, बोले- उनकी कथनी और करनी में अंतर

संजय निषाद ने सपा की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछड़ों के नाम पर राजनीति करने वालों ने 27 प्रतिशत आरक्षण पर अकेले कब्जा कर लिया।

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Sanjay Nishad- Akhilesh Yadav
अब संजय निषाद का बड़ा दावा | Image: ANI

कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की PDA राजनीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश विचारधारा से चलता है और राजनीति की शुरुआत इस सोच के साथ हुई थी कि गरीब आदमी भी राजा बने, लेकिन दुर्भाग्य से गरीबों के वोट और गरीबों के नोट पर पलने वाले नेता अब गरीबों को ही भूल गए हैं। संजय निषाद ने सपा की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछड़ों के नाम पर राजनीति करने वालों ने 27 प्रतिशत आरक्षण पर अकेले कब्जा कर लिया।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ‘अदर मैन’ कहां चले गए। संजय निषाद ने सपा की राजनीति में कार्यकर्ताओं की भूमिका और नेतृत्व के तौर-तरीकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी भी काम को कार्यकर्ता ही करता है। कार्यकर्ता समर्पित और संकल्पित होकर काम करता है। लेकिन आज स्थिति यह है कि कार्यकर्ता धूप में खड़े रहें, दरी बिछाएं और नेता एसी में बैठकर हाथ हिलाएं। संजय निषाद ने कहा कि नारा दिया गया था- ‘हर बिरादरी जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’, लेकिन कुछ लोग सब पर भारी हो गए और बाकी बेचारे रह गए।

‘गरीबों के बीच की यात्रा होनी चाहिए’

PDA यात्रा और अखिलेश यादव की 20 करोड़ ती लग्जरी गाड़ी पर निशाना साधते हुए संजय निषाद ने कहा कि यात्रा निकालना हर आदमी का हक है, लेकिन यह भी तय होना चाहिए कि यात्रा किसकी होनी चाहिए और कैसे निकलनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि अगर यात्रा गरीबों के पास जा रही है तो उसे गरीब की गली में भी जाना चाहिए। उनके मुताबिक जब तक नेता गरीब की गली और गांव में नहीं रहेगा, तब तक गरीबों के बीच की वास्तविकता को नहीं समझ सकता। उन्होंने साफ कहा कि यात्रा गरीबों और गांव के बीच की होनी चाहिए, केवल सड़क पर निकलने वाली यात्रा नहीं।

‘मुंह से PDA, दिल में लग्जरी रथ’

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संजय निषाद ने अखिलेश यादव की राजनीति में लग्जरी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जनता अब सब तय करेगी और जनता ने ही ऐसे लोगों को सत्ता से बाहर किया है। उनके मुताबिक जब राजनीति की बात गरीबों और पिछड़ों के नाम पर हो, लेकिन जीवनशैली और राजनीतिक तौर-तरीकों में लग्जरी दिखाई दे, तो जनता इस अंतर को पहचानती है।

‘साइकिल की बात करने वाले अब बड़ी-बड़ी गाड़ियों में’

अखिलेश यादव की साइकिल वाली राजनीति पर भी संजय निषाद ने हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक तरफ साइकिल की बात होती है, दूसरी तरफ बड़ी-बड़ी गाड़ियां चलती हैं। संजय निषाद ने इसे कथनी और करनी के अंतर से जोड़ते हुए कहा कि जब कथनी और करनी में अंतर होता है तो जनता निश्चित रूप से दूर होती है।

‘गरीबों के लिए आई थी राजनीति, लग्जरी के लिए नहीं’

संजय निषाद ने कहा कि देश में राजनीति गरीब, भूमिहीन, आवासहीन और उजड़े लोगों के लिए शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि देश के लिए लड़ने वाले, उजड़ने वाले और गरीब होने वाले लोगों के लिए राजनीति आई थी। उनका कहना था कि लोकसभा और लोकतंत्र गरीबों के लिए आए थे, लग्जरी के लिए नहीं।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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