'एक नहीं दो बार आमंत्रण...', BRICS समिट में PM तारिक रहमान के निमंत्रण विवाद पर भारतीय विदेश मंत्रालय की आई प्रतिक्रिया, बांग्लादेश की खुल गई पोल

प्रधानमंत्री तारिक रहमान को निमंत्रण भेजने के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेश के सारे दावों की पोल खोल दी है।

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BRICS Summit 2026
BRICS समिट में PM तारिक रहमान के निमंत्रण विवाद पर भारतीय विदेश मंत्रालय की आई प्रतिक्रिया | Image: X/Republic

राजधानी दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुए BRICS समिट में कई देशों के राष्ट्रध्यक्षों ने हिस्सा लिया। मगर इस शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने हिस्सा नहीं लिया। सम्मेलन से पहले बांग्लादेश की ओर से यह दावा किया गया था कि उन्हें भारत की तरफ से कोई निमंत्रण नहीं मिला था। अब इस मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को अपना रुख साफ करते हुए कहा कि तारिक रहमान को दो बार आमंत्रित किया गया था।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को निमंत्रण भेजने के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट में तारिक रहमान को बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किया गया था। यह कहना कि भारत की ओर से निमंत्रण नहीं दिया गया ये गलत है।

बांग्लादेश के दावे पर भारत की प्रतिक्रिया

रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री को द्विपक्षीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया था। इसके बाद उन्हें BIMSTEC की अध्यक्ष के तौर पर ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया गया था। इसलिए, उन्हें दो निमंत्रण मिले थे - एक द्विपक्षीय यात्रा के लिए और दूसरा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए।'

तारिक रहमान के निमंत्रण को लेकर विवाद

बता दें कि बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा था कि भारत में आयोजित ब्रिक्स समिट में न तो प्रधानमंत्री तारिक रहमान जाएंगे और न ही कोई अन्य प्रतिनिधि। उन्होंने कहा था, “जब माहौल अनुकूल होगा और आपसी सम्मान बना रहेगा, तब द्विपक्षीय यात्राएं होंगी। इसमें जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है।“

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हुमायूं कबीर ने यह भी कहा था कि  “भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर ब्रिक्स समिट में शामिल होने का न्योता दिया था। इसे द्विपक्षीय निमंत्रण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पहली यात्रा बहुपक्षीय नहीं हो सकती। हम द्विपक्षीय यात्राओं और बातचीत को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।”

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Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड