'नेहरू जी या दुनिया में कोई भी जी होता कौन है....' , वंदे मातरम गाने को लेकर विवाद पर रिपब्लिक समिट में बोले मनोज मुंतशिर, बताया राष्ट्रगीत का मतलब

'रिपब्लिक समिट' में मनोज मुंतशिर ने वंदे मातरम गाने को लेकर चल रहे विवाद पर खुलकर बातचीत की और बताया कि राष्ट्रगीत पूरा गाने से किसे एतराज है।

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Manoj Muntashir
Manoj Muntashir in Republic Summit | Image: Republic

Republic Summit 2026: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के समिट का शानदार आगाज हुआ। कार्यक्रम में राजनीति से लेकर मनोरंजन, व्यापार समेत अलग-अलग क्षेत्रों की दिग्गज हस्तियां शिरकत कर रही है और अपने विचार रिपब्लिक के मंच से साझा कर रहे हैं। समिट के चीफ गेस्ट महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं। 'रिपब्लिक समिट 2026' की शुरुआत गीतकार, लेखक और कवि मनोज मुंतशिर ने अपनी देशभक्ति कविता 'मैं उस भारत से आता हूं' सुनाकर की। इसके बाद मंच से उन्होंने अपने व्यक्तिगत पहलुओं से लेकर हर क्षेत्र के बारे में खुलकर बात की।

कुछ लेखक ऐसे होते हैं जो भारत के बारे में लिखते हैं, और कुछ ऐसे होते हैं जो भारत के अपने विचार को एक तर्क में बदल देते हैं। मुंबई में 'रिपब्लिक समिट 2026' में मनोज मुंतशिर ने ये दोनों काम किए। उन्होंने उन अनुभवों के बारे में बताया जिन्होंने उनके लेखन को आकार दिया, साथ ही आज के भारत में आस्था, संस्कृति और पहचान से जुड़े कुछ सबसे विवादास्पद मुद्दों पर भी बात की।

वंदे मातरम विवाद पर क्या बोले मनोज मुंतशिर?

'रिपब्लिक समिट' में जब मनोज मुंतशिर से सवाल किया गया कि अभी भारत में कुछ दिनों से वंदे मातरम गाने को लेकर विवाद चल रहा है। आधा गाएंगे कि पूरा गाएंगे। 6 छंद गाएंगे कि 2 छंद गाएंगे, नहीं गाएंगे। इस पर आप क्या राय रखते हैं? इसके जवाब में मुंतशिर ने कहा, दुर्भाग्य है इस देश कि आजादी के बाद इस बात पर बहस हो रही है कि वंदे मातरम गाएंगे कि नहीं गाएंगे। 1896 में कांग्रेस का जब पहला अधिवेशन हुआ था, तो वंदे मातरम पूरा गाया गया था।

मनोज मुंतशिर कांग्रेस पर साधा निशाना 

कांग्रेस पर निशाने साधते हुए मुंतशिर ने आगे कहा, 1896 से 1937 तक वंदे मातरम पूरा गाया गया था। 41 साल तक किसी को कोई आपत्ति नहीं हुई कि वंदे मातरम पूरा क्यों गाया जा रहा। 1896 में कांग्रेस अधिवेशन में अध्यक्ष रहीमतुल्ला एम. सयानी थे। वो एक मुसलमान थे और उनको कोई आपत्ति नहीं थी कि वंदे मातरम पूरा गाया जाए। आज भी देश के सच्चे मुसलमानों को इससे कोई आपत्ति नहीं है।

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वंदे मातरम गाने से किसे एतराज?

वंदे मातरम पूरा गाने से एतराज किसे हुआ। 1937 में सबसे पहले मोहम्मद अली जिन्ना को और मुस्लिम लीग को। मुझे इस बात पर एतराज नहीं कि उनको वंदे मातरम गाने से एतराज था, बल्कि मुझे एतराज इस बात से है कि उनकी आपत्ति को नेहरू जी ने स्वीकार कर लिया। पंडिट नेहरू ने इसे स्वीकार कर लिया क्योंकि बांकी के जो 4 छंद है, उनमें हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र है तो उसे नहीं गाया जाएगा, और यहां हमारी संस्कृति को सेंसर कर लिया गया। आज मैं पूछता हूं नेहरू जी या दुनिया में कोई भी जी कौन होता है हमारी संस्कृति को सेंसर करने वाले?

मैं सेक्युलर नहीं,हिंदू हूं-मनोज मुंतशिर

मनोज मुंतशिर ने वंदे मातरम का अर्थ समझाते हुए कहा कि क्यों दो ही छंद राष्ट्रगीत के गाया जाए। वंदे मातरम का अर्थ क्या हैं? मां तुझे सलाम। क्या समस्या है? अगर इस धरती को अपनी मां मानते हैं तो इसे प्रणाम करने में समस्या क्या है? एक तरफ तो आप हिंदू मुस्लिम भाई-भाई के नारे लगाते हो और दूसरी तरफ वंदे मातरम नहीं गाएंगे तो ऐसे कैसे चलेगा। मुंतशिर ने 'रिपब्लिक समिट' में साफ-साफ कहा कि "मैं सेक्युलर नहीं हूं- मैं हिंदू हूं, और इतना ही काफी है।"

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Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड