ममता को 'बेबस' कर देगा ये झटका! पार्टी में बड़ी फूट के संकेत, 20 और सांसद दिल्ली में होंगे इकट्ठा, क्या एक नया गुट बनाने की हो रही तैयारी?

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रहे संकट के बीच, खबर है कि पार्टी के करीब 20 बागी सांसद अगले दो दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में इकट्ठा होने वाले हैं।

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mamata | Image: Republic

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रहे संकट के बीच, खबर है कि पार्टी के करीब 20 बागी सांसद अगले दो दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में इकट्ठा होने वाले हैं। यह उस पार्टी में बड़ी फूट का संकेत है जो लंबे समय से ममता बनर्जी के नेतृत्व की पहचान रही है।

'रिपब्लिक बांग्ला' को मिली खास जानकारी के मुताबिक, बागी सांसद जल्द ही दिल्ली जा सकते हैं और आगे की रणनीति बनाने के लिए अहम बैठकें करेंगे। सूत्रों का कहना है कि इस ग्रुप की योजना लोकसभा स्पीकर को एक औपचारिक पत्र सौंपने की है, जिसमें ममता बनर्जी के नियंत्रण से बाहर एक अलग गुट के तौर पर मान्यता की मांग की जाएगी।

राजधानी में डेरा डालने की तैयारी

हफ्तों से चल रही यह बगावत अब पूरी तरह से दिल्ली पहुंच गई है। खबर है कि कई TMC सांसद अपनी मांगों को मनवाने और मूल पार्टी से अलग होने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने के लिए राजधानी में डेरा डालने की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि ये घटनाक्रम TMC के टूटने की प्रक्रिया में "आखिरी कील" साबित हो सकते हैं।

इस उथल-पुथल के बीच, पार्टी के ज्यादातर राज्यसभा सांसद अब अलग-थलग पड़ गए हैं और कई लोगों ने कोलकाता में मौजूद मुख्य नेतृत्व से दूरी बना ली है। पार्टी के अंदर का यह मतभेद संसद के दोनों सदनों तक फैल गया है, जिससे TMC की भविष्य की एकता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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ममता से दूर हो रही पार्टी

एक और दावे ने ममता बनर्जी की स्थिति को और कमजोर कर दिया है; TMC के वरिष्ठ नेता रिताब्रता बनर्जी ने दावा किया है कि उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा के 61 विधायकों का समर्थन हासिल है। अगर यह दावा सच साबित होता है, तो इसका मतलब होगा कि पार्टी की विधायी ताकत का एक बड़ा हिस्सा मुख्यमंत्री से दूर हो रहा है।

पार्टी पर नजर रखने वालों का मानना ​​है कि इस बगावत के बाद, TMC की संगठनात्मक ताकत का केवल 9% हिस्सा ही ममता बनर्जी के साथ मजबूती से जुड़ा रह सकता है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी के अहम हिस्सों में उन्हें मिलने वाले समर्थन में भारी कमी आई है।

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ये घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में एक बड़े राजनीतिक भूचाल की तरह हैं, जहां TMC का पिछले 15 सालों से दबदबा रहा है। अगर पार्टी औपचारिक रूप से टूटती है और किसी नए गुट को मान्यता मिलती है, तो भविष्य के चुनावों से पहले राज्य की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है और संसद में विपक्ष के खेमे में भी समीकरण बदल सकते हैं।

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Published By:
 Kunal Verma
पब्लिश्ड