ट्विशा शर्मा मौत मामले में सास गिरिबाला सिंह को लगा बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज, HC ने कहा- मृतका के शरीर पर चोटें...

हाईकोर्ट ने ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को 15 मई को भोपाल के 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ट्विशा के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं,जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

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Mother-in-law of victim and retired judge Giribala Singh on Twisha Sharma death case
गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज | Image: Republic

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल के हाई प्रोफाइल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में बड़ी कार्यवाही करते हुए आरोपित सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। बुधवार को हाईकोर्ट में गिरिबाला की अग्रिम जमानत के खिलाफ लंबी बहस चली। लगभग पौने तीन घंटे तक चली बहस और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, फिर देर शाम कोर्ट ने मामले पर अपना फैसला सुनाया।

कोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत खारिज कर दी। जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने बुधवार को लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, व्हाट्सएप चैट, गवाहों के बयान और केस डायरी जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। 

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मिले शरीर पर चोट के निशान

कोर्ट ने माना कि मृतका के शरीर पर कई एंटीमॉर्टम चोटें थीं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के नतीजों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि ये चोटें ट्विशा की मौत से पहले हुई किसी हाथापाई के थे। इन चोटों के मौत के बाद फंदे से शव उतारते समय लगने के अनुमान को भी रिपोर्ट में खारिज कर दिया गया।

गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका की खारिज

हाईकोर्ट ने ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को 15 मई को भोपाल के 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। यह जमानत BNS, 2023 की धारा 80(2), 85, 3(5) और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दी गई थी।

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जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और CBI ने आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह ने जांच में सहयोग नहीं किया गया और नोटिसों के बावजूद बयान देने से बचती रहीं। कोर्ट के सामने यह भी कहा गया कि CCTV फुटेज के चयनित हिस्से मीडिया में लीक किए गए। हाईकोर्ट ने माना कि मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है तथा जांच अभी प्रारंभिक स्तर पर है।

सास और पति पर ट्विशा के साथ क्रूरता करने का आरोप

कोर्ट में राज्य सरकार ने बताया कि ट्विशा की प्रेग्नेंसी की वजह से परिवार के भीतर झगड़े शुरू हो गए थे और उनके खिलाफ बार-बार बेहद गंभीर व अपमानजनक टिप्पणियां की जाती थीं। ट्विशा की मां के साथ व्हाट्सएप चैट में इसके सबूत भी मिले हैं। जब कोर्ट ने पूछा कि क्या ये आरोप पति के खिलाफ हैं, सास के खिलाफ हैं, या दोनों के खिलाफ हैं? तो राज्य सरकार ने जवाब दिया कि दोनों ने ही उसके साथ क्रूरता की थी

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कोर्ट ने कहा जल्दबाजी में दी गई राहत

अदालत ने कहा कि अग्रिम जमानत जैसे असाधारण राहत आदेश देते समय अधिक सावधानी जरूरी थी। सीबीआई को मामले में पक्षकार बनाते हुए कोर्ट ने 15 मई 2026 को पारित अग्रिम जमानत आदेश को रद्द कर दिया।

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Published By :
Rupam Kumari
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