MP: दहेज में 100 तोला सोना, गाड़ी और लाखों दिया कैश, फिर शादी के 99 दिन बाद वकील बेटी की मौत; परिवार ने मेजर दामाद पर लगाया हत्या का आरोप
भोपाल के बाद अब जबलपुर में एक नवविवाहिता की संदिग्ध मौत का मामले सामने आया है। लड़की के परिवार वालों ने मेजर दामाद पर दहेज के लिए हत्या करने का आरोप लगाया है।
- भारत
- 5 min read

मध्य प्रदेश के भोपाल की ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एक और नवविवाहिता की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भोपाल के बाद अब जबलपुर में एक नवविवाहिता की संदिग्ध मौत का मामले सामने आया है। लड़की के परिवार वालों ने मेजर दामाद पर दहेज के लिए हत्या करने का आरोप लगाया है। पुलिस में FIR दर्ज कराने के बाद अब पीड़ित पिता ने जबलपुर ADG कोर्ट में न्याय की गुहार लगाई है।
चेन्नई निवासी पी. दक्षिणामूर्ति अपनी 27 वर्षीय बेटी कविता की मौत को दहेज हत्या बता रहे हैं और पिछले एक साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। कविता पेशे से वकीस थीं और मद्रास हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करती थीं। पिता का आरोप है कि शादी के बाद जम्मू एन्ड कश्मीर RRC रेजिमेंट, सेना में मेजर डॉक्टर पति उनकी बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और अतिरिक्त पैसों की मांग पूरी नहीं होने पर उसकी हत्या कर दी गई।
शादी के 99 दिन बाद वकील बेटी की मौत
पी. दक्षिणामूर्ति ने बताया कि 9 जून 2025 को वो खुद बेटी को ससुराल छोड़कर आए थे। उस समय कविता पूरी तरह स्वस्थ थी। पिता के मुताबिक वह मुस्कुरा रही थी और अपने भविष्य को लेकर उत्साहित थी। लेकिन उसी रात करीब 9:30 बजे परिवार को सूचना मिली कि कविता बाथरूम में गिर गई है और उसे अस्पताल ले जाया गया है। आधी रात को मिली इस सूचना के बाद परिवार अगले दिन जबलपुर पहुंचा। दक्षिणामूर्ति का कहना है कि जब उन्होंने सैन्य अस्पताल में बेटी को देखा तो वह वेंटिलेटर पर थी। उसके शरीर में कोई हरकत नहीं थी और आंखों में भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई दे रही थी। कुछ घंटों बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मानसिक प्रताड़ना और मारपीट का आरोप
पिता का आरोप है कि कविता शादी के बाद लगातार मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रही थी। उन्होंने बताया कि बेटी के मोबाइल फोन में मिले मैसेज और बातचीत से पता चला कि उसे बॉडी शेमिंग का सामना करना पड़ता था। घर में पहले से मेड होने के बावजूद उससे बर्तन साफ करवाए जाते थे, शौचालय साफ करवाया जाता था और पूरे घर का काम कराया जाता था। पिता का कहना है कि कविता एक पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर वकील थी, लेकिन उसे जानबूझकर अपमानित करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया।
Advertisement
दहेज में 100 तोला सोना के साथ करोड़ों का दिया गिफ्ट
दक्षिणामूर्ति ने आरोप लगाया कि शादी से पहले भी लड़के पक्ष की ओर से भारी दहेज की मांग की गई थी। परिवार ने लगभग 100 तोला सोना, 20 लाख रुपए के हीरे के आभूषण, महिंद्रा एक्सयूवी वाहन, चांदी के सामान और घर-गृहस्थी का पूरा सामान दिया था। इसके बावजूद शादी के बाद अस्पताल निर्माण के नाम पर पहले 50 लाख रुपए और बाद में 2 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मांग की गई।
मेजर दामाद ने अस्पताल के नाम पर मांगा 2 करोड़ दहेज
पिता के अनुसार 9 जून को जब वह बेटी को छोड़ने गए थे, तब दामाद डॉक्टर मेजर ओम नागार्जुन ने अस्पताल खोलने के लिए 2 करोड़ रुपए आर्थिक सहायता मांगी थी। उन्होंने तत्काल इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थता जताई। इसके बाद लड़के पक्ष का व्यवहार बदल गया और उन्होंने बातचीत लगभग बंद कर दी। मृतका के पिता के अधिवक्ता मनीष वर्मा ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कविता की शादी मार्च 2025 में हुई थी और विवाह के दौरान लड़के पक्ष की सभी मांगें पूरी की गई थीं। इसके बावजूद विवाह के बाद लड़की को प्रताड़ित किया गया और अतिरिक्त दहेज की मांग जारी रही।
Advertisement
अधिवक्ता ने मर्ग जांच का हवाला देते हुए कई सवाल भी उठाए हैं। उनके मुताबिक घटना वाली रात कविता को लगभग 10 बजे घर से अस्पताल ले जाया गया था। जबकि गूगल मैप के अनुसार घर से सैन्य अस्पताल की दूरी महज पांच मिनट की है। इसके बावजूद अस्पताल पहुंचने का समय रात 12:39 बजे दर्ज है। ऐसे में करीब ढाई घंटे का अंतर कई संदेह पैदा करता है।
कविता के सिर पर मिले चोट के निशान
वकील मनीष वर्मा का आरोप है कि इस दौरान कविता के साथ मारपीट की गई हो सकती है, जिसके कारण वह बेहोश हो गई। उनका यह भी दावा है कि अस्पताल में उसका इलाज गलत दिशा में किया गया और मामले को हृदय संबंधी समस्या बताने की कोशिश की गई। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी कई सवाल खड़े कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार कविता के सिर पर दो गंभीर चोटें पाई गईं। एक चोट माथे के हिस्से में और दूसरी सिर के पिछले हिस्से में दर्ज की गई है। परिवार का कहना है कि इन चोटों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
परिजनों का आरोप है कि गोराबाजार थाना में शिकायत देने के बावजूद लंबे समय तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। बाद में पुलिस अधीक्षक से भी शिकायत की गई, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद परिवार ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अब मामले में रिवीजन याचिका दायर की गई है। कविता के पिता का कहना है कि उन्हें आज भी संविधान और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।
पीड़ित पिता ने न्याय की लगाई गुहार
पीड़ित पिता ने भावुक अपील करते हुए कहा कि दहेज एक मीठा जहर है, जो धीरे-धीरे पूरे परिवार को खत्म कर देता है। उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन वह चाहते हैं कि किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और परिवार अपनी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है।