अपडेटेड 2 January 2026 at 10:42 IST
MP: इस बैक्टीरिया की वजह से इंदौर में लोगों की हुई मौत, पानी की सैंपल रिपोर्ट में बड़ा खुलासा; मामला पहुंचा HC तो वार्ड पार्षद ने लिखी CM को चिट्ठी
भागीरथपुरा में नर्मदा लाइन से सप्लाई हो रहे हैं पानी की जांच रिपोर्ट में दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। सैंपल में फीकल कॉलीफॉर्म, ई कोलाई और क्लेस बेला जैसे बैक्टीरिया मिले हैं। इन बैक्टीरिया की वजह से उल्टी और दस्त का खतरा होता है।
- भारत
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Indore Contaminated Water: देश का सबसे स्वच्छ शहर मध्य प्रदेश का इंदौर इन दिनों पानी में मिलावट की त्रासदी को झेल रहा है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की वजह हड़कंप मच हुआ है। नर्मदा की पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का गंदा पानी मिल गया। दूषित पानी पीने से अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है तो सैकड़ों लोग बीमार हैं। अब तक पानी की सैंपल जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है।
भागीरथपुरा में नर्मदा लाइन से सप्लाई हो रहे हैं पानी की जांच रिपोर्ट में दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। सैंपल में फीकल कॉलीफॉर्म, ई कोलाई और क्लेस बेला जैसे बैक्टीरिया मिले हैं। इन बैक्टीरिया की वजह से उल्टी और दस्त का खतरा होता है। जानकारी के मुताबिक कुछ सैंपल में विब्रियो कोलेरी जैसे तत्व भी मिले हैं, जो हैजा की बीमारी में पाए जाते है।
अब तक 80 सैंपल की हुई जांच
जानकारी के मुताबिक, अभी तक 80 सैंपल की जांच कराई गई है। जिसमें से कुछ की रिपोर्ट आ गई है। लैब से डिटेल आने में 1 से 2 दिन लग सकते हैं। पानी के नमूनों की जांच MGM मेडिकल कॉलेज की लैब में हुई है। इलाके में पीने का पानी सप्लाई करने वाली मेन पाइपलाइन एक पब्लिक टॉयलेट के नीचे से गुजरती है। मेन लाइन में लीकेज के कारण, सीवेज का पानी कथित तौर पर पीने के पानी में मिल गया।
इतने मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती
दूषित पानी पीने से कुल 201 मरीजों का अस्पतालों में इलाज जारी है। 32 मरीज अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं। अब तक 8571 मरीजों की जांच की जा चुकी है। फिलहाल मौत की संख्या को लेकर असमंजस बना हुआ। 13 लोगों की मौत की बात कही जा रही है। मगर आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं कई गई है।
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वार्ड पार्षद ने लिखी CM को चिट्ठी
इधर इलाके के वॉर्ड 11 के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को लिखी चिट्ठी है। जिसमें उन्होंने लिखा है-नर्मदा की नई पाइपलाइन की फाइल 12 नवंबर 2024 को तैयार कर ली गई थी। अफसरों ने 7 महीने तक फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया। दबाव डालने पर 30 जुलाई 2025 को टेंडर जारी किया गया, लेकिन टेंडर के काम को समय सीमा में पूरा नहीं किया गया।
अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप
कई बार शहरवासियों ने विधायक, पार्षद और महापौर से इसकी शिकायतें भी की थी। 311, सीएम हेल्पलाइन पर लंबे समय से शिकायतें हो रही थी। महापौर ने निर्देश दिए थे कि अमृत योजना के फंड का इंतजार ना किया जाए, बल्कि पाइपलाइन का काम फौरन शुरु किया जाए, लेकिन अफसरों ने मेयर के निर्देशों का पालन नहीं किया। 29 दिसंबर 2025 को क्षेत्र में बीमारी फैल गई तब अधिकारियों की नींद खुली। कमल वाघेला ने अफसरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीएम मोहन यादव से दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
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हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई
मामला अब हाइ कोर्ट तक पहुंच गया है। आज, 2 जनवरी को हाई कोर्ट में दूषित पानी के मामले सुनवाई होनी है। करीब 12 बजे के बाद सुनवाई संभव है। कोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। आज प्रशासन रिपोर्ट दाखिल कर सकता है। जबलपुर से डबल बेंच के जज ऑनलाइन मामले की सुनवाई करेंगे।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 2 January 2026 at 10:42 IST