भोपाल गैस त्रासदी: 'ये कांग्रेस के पाप थे...', यूनियन कार्बाइड अपशिष्ट जलाने के मामले पर CM मोहन यादव का विपक्ष पर तंज

मोहन यादव ने यूनियन कार्बाइड अपशिष्ट जलाने के मामले पर कहा, ये कांग्रेस के पाप थे। कांग्रेस के शासन में उस फैक्ट्री में 10 लाख लोग मारे गए थे।

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MP CM Mohan Yadav
MP CM Mohan Yadav | Image: ANI

दो-तीन दिसंबर 1984 की रात हुई दुनिया की सबसे भीषणतम औद्योगिक त्रासदी भोपाल गैस कांड एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, घटना के 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड कारखाने डम्प पड़े जहरीले रासायनिक कचरे को जलाने के काम शुरू हुआ है। मध्यप्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे में से 10 टन अपशिष्ट को परीक्षण के तौर पर जलाकर भस्म किए जाने के पहले दौर की प्रक्रिया बृहस्पतिवार को कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शुरू कर दी गई।  अब इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है।


मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यूनियन कार्बाइड अपशिष्ट जलाने के मामले पर कहा, "ये कांग्रेस के पाप थे। कांग्रेस के शासन में उस फैक्ट्री में 10 लाख लोग मारे गए और उनकी सरकार लंबे समय तक सत्ता में रही, लेकिन उन्होंने इसे ऐसे ही छोड़ दिया। कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार के दौरान पीथमपुर का चयन किया गया था। उन्होंने ही लाइसेंस दिया था। जब हमने ये तथ्य कोर्ट के सामने रखे, तो सब कुछ स्पष्ट हो गया।

वो पाप खुद करती है और दोष…- मोहन यादव

मोहन यादव ने आगे कहा, कांग्रेस हमेशा दोहरा मापदंड अपनाती है। वो पाप खुद करती है और दोष किसी और पर डालने की कोशिश करती है। कांग्रेस नेता कमलनाथ के बयान पर उन्होंने कहा, उनके समय में औद्योगिक विकास दर एक भी नहीं थी। यह हमारी सरकार है जिसकी वजह से मध्य प्रदेश सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों में शामिल है।

40 साल बाद यूनियन कार्बाइड कचरा जलाने का काम शुरू

कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए सीएम मोहन यादव ने आगे कहा कि जब मंत्रिमंडल के निर्णय के आधार पर यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे को पीथमपुर में एक निजी कंपनी की ओर से संचालित अपशिष्ट निपटान इकाई में नष्ट करने का फैसला किया गया, तब भी सूबे में कांग्रेस की ही सरकार थी। कांग्रेस की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने ही इस इकाई को लाइसेंस दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे के निपटान के मामले में उनकी सरकार ने जब अदालत के सामने तथ्य रखे, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।  

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Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड