Basant Panchami 2025: 'प्रकृति और ज्ञान के संगम का प्रतीक...', CM भजनलाल शर्मा ने बताया बसंत पंचमी का महत्व
देशभर में बसंत पंचमी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने विचार साझा किए।
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CM Bhajanlal Sharma: देशभर में 2 फरवरी को बसंत पंचमी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। कई जगहों पर इसे आज भी हर्षोल्लास के साथ सेलिब्रेट किया गया। इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने विचार साझा किए।
उन्होंने बसंत पंचमी का महत्व बताते हुए कहा कि बसंत पंचमी एक ऐसा त्योहार है जो प्रकृति और ज्ञान के संगम का प्रतीक है। यह ऋतुराज वसंत के आगमन का उत्सव है, जो पृथ्वी पर नवीनता का पुनः सृजन करता है। इस दिन पेड़-पौधों में नव कोपलें उगती हैं, और दूर तक सरसों के पीले रंग के पुष्पों की चादर छा जाती है।
'मां सरस्वती की आराधना का पर्व बसंत पंचमी'
सीएम ने कहा कि बसंत पंचमी का महत्व केवल धार्मिक-सांस्कृतिक ही नहीं बल्कि शैक्षणिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत गहरा है। यह ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की आराधना का पर्व है। ऐसा माना जाता है कि बसंत पंचमी के ही दिन भगवान ब्रह्मा जी की जिह्वा से वाणी, ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती प्रकट हुई थी।
बसंत पंचमी से होता है रंगोत्सव का आगाज- सीएम
उन्होंने आगे बताया कि इस दिन से ही रंगोत्सव का आगाज भी हो जाता है जो हमारे जीवन में उल्लास और उमंग का संचार करता है। बसंत पंचमी के अवसर पर लोग पीले वस्त्र पहनते हैं, पीले रंग के व्यंजन बनाते हैं और अपने घरों में पीले फूलों की सजावट करते हैं।
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ज्ञान के महत्व को समझने की प्रेरणा मिलती है- CM
बसंत पंचमी से जुड़ी अधिक जानकारी देते हुए वह बताते हैं कि इस त्योहार के माध्यम से हमें ज्ञान के महत्व को समझने और उसका सही उपयोग करने की प्रेरणा मिलती है। जैसा कि महाकवि कालिदास की कहानी से पता चलता है कि ज्ञान का अहंकार नहीं करना चाहिए बल्कि उसका उपयोग समाज के कल्याण के लिए करना चाहिए।