मोदी सरकार फिर करने जा रही बड़ा बदलाव, अब लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़कर हो जाएगी 850, महिलाओं के लिए कितनी सीटें होंगी आरक्षित?
केंद्र सरकार ने लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का ऐतिहासिक प्रस्ताव दिया है। 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में 'संविधान (131) संशोधन विधेयक' पेश किया जा सकता है।
- भारत
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Lok Sabha Seats Increase: सरकारी सर्कुलर और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नए प्रस्तावित ढांचे में निचले सदन यानी लोकसभा की शक्ति में लगभग 50% से अधिक की वृद्धि करने की संभावना है। सर्कुलर के अनुसार, कुल मिलाकर 850 सीटें प्रस्तावित हैं, जिसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के लिए 35 सीटें निर्धारित करने का प्रावधान शामिल है।
वर्तमान में, परिसीमन आयोग द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार लोकसभा में 543 निर्वाचित सदस्य होते हैं। जिनमें राज्यों के लिए 530 सीटें और UTs के लिए 20 सीटों का प्रावधान है। नया प्रस्ताव इस संख्या को सीधे 850 तक ले जाएगा, जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा विस्तार होगा।
महिला आरक्षण को लागू करने की तैयारी
इस बिल का एक और महत्वपूर्ण पहलू महिला आरक्षण है। सरकार ऐसे संशोधन पेश करने जा रही है जिससे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के चुनावों से पहले ही लागू किया जा सके। मौजूदा समय सीमा के अनुसार, यह आरक्षण 2027 के बाद होने वाली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ा था, लेकिन नए बिल के जरिए सरकार इसे जल्द प्रभावी बनाना चाहती है।
अब तक आई जानकारी के अनुसार लोकसभा के सांसदों की कुल संख्या 816 तक रहने की बात कही जा रही थी, लेकिन अब यह आंकड़ा 850 होने की चर्चा है। इसके तहत 815 सीटें राज्यों में होंगी। वहीं 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों से आएंगी, जिनमें से अकेले 11 सीट राजधानी दिल्ली में होंगी। वहीं महिलाओं के लिए कम से कम 273 सीटें यानी रिजर्व रखी जाएंगी।
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16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र
सरकार ने इस ऐतिहासिक 'संविधान (131) संशोधन विधेयक' को 16 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र में पेश करने की योजना बनाई है। यह सत्र 18 अप्रैल तक चलेगा। सांसदों के बीच बिल की प्रतियां पहले ही बांटी जा चुकी हैं ताकि इस पर चर्चा की जा सके।
इसके बाद ऐसी संभावनाएं हैं कि प्रस्ताव को लेकर सियासी गलियारों में घमासान मचने के आसार हैं। विपक्ष ने सरकार के इस कदम पर कई सवाल भी उठाए हैं। इस बीच विपक्ष का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन (Delimitation) को जबरन आगे बढ़ा रही है।
दो-तिहाई बहुमत की जरूरत
वहीं विधेयक में OBC महिलाओं के लिए 'कोटा के भीतर कोटा' का प्रावधान नहीं होने पर भी विवाद की स्थिति बनी हुई है। बता दें, संविधान संशोधन बिल होने के कारण इसे पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, सरकार के पास पर्याप्त वोट नहीं हैं, ऐसे में उसे विपक्षी दलों के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होगी।
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परिसीमन का इतिहास
संविधान के अनुसार, हर जनगणना के बाद सीटों का पुनर्गठन होना चाहिए, लेकिन 1976 में आपातकाल के दौरान इसे 2000 तक के लिए और फिर 2001 में इसे 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। अब जबकि नई संसद की इमारत (सेंट्रल विस्टा) अधिक सांसदों के बैठने की क्षमता के साथ तैयार है, सरकार जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। ऐसे में सबकी नजरें 16 अप्रैल को शुरू होने वाले विशेष सत्र पर टिकी हैं।