Delhi Excise Policy: के कविता को 'सुप्रीम' झटका, कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
शराब घोटाला मामले में बीआरएस नेता के कविता को झटका, याचिका खारिज

K Kavitha Plea Rejected: शराब घोटाला मामले में बीआरएस नेता के कविता को जोर का झटका दिया है। उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया है। इस तरह अदालत ने कविता को जमानत देने से इनकार कर दिया है। ईडी ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था जिसके बाद वो जमानत के लिए शीर्ष अदालत पहुंची थीं।
के. कविता की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे सभी के लिए एक समान नीति का पालन करना होगा। किसी को भी जमानत के लिए सीधे शीर्ष कोर्ट में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि यह एक राजनीतिक मामला है और के कविता एक राजनीतिक शख्सियत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कविता की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर एक नोटिस जारी की। अदालत का कहना है कि कविता निचली अदालत में जा सकती हैं या जमानत के लिए कोई और कोई और तरीका अपना सकती हैं। अगर जमानत याचिका दायर की जाती है तो उस पर तेजी से फैसला किया जा सकता है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने प्रोटोकॉल की अनदेखी न करने का आदेश दिया। कहा कि सभी के लिए एक समान नीति का पालन करना होगा और जमानत के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
पीठ ने कहा कि जहां तक धन शोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों को चैलेंज देने वाली याचिका का सवाल है, अदालत ईडी को नोटिस जारी कर छह हफ्ते के भीतर जवाब मांग रही है। पीठ ने कविता की ओर से पेश वरिष्ठ एडवोकेट कपिल सिब्बल से कहा कि इन प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका लंबित मामलों के साथ आएगी। शुरुआत में सिब्बल ने कहा कि सरकारी गवाह के बयान के आधार पर लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। इस पर पीठ ने कहा कि वह फिलहाल मामले के गुण-दोष पर विचार नहीं कर रही है।
कविता इस केस में 15 मार्च को गिरफ्तार किया था। उन्हें ईडी हैदराबाद से दिल्ली लेकर आई थी। उन्हें ईडी ने कोर्ट में पेश किया। जहां से वो 23 मार्च के लिए हिरासत में भेज दी गई थीं। ईडी का दावा है कि के. कविता उस दक्षिण लॉबी का हिस्सा है जिसने आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ मिलकर कथित तौर पर साजिश रची। इस लॉबी ने दिल्ली शराब नीति में फायदा पाने के लिए आप नेताओं को करीब 100 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।